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46 साल में पहली बार सूखा लोगों की प्यास बुझाने वाला तालाब

Mon, 13 Jun 2016 04:23 PM IST
चंदन बंगारी / अमर उजाला, काशीपुर
चंदन बंगारी / अमर उजाला, काशीपुर Updated Mon, 13 Jun 2016 04:23 PM IST
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tumariya pond drought
tumariya pond drought - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश नहीं होने का असर मैदानी क्षेत्रों में पानी के संकट के रूप में दिख रहा है। कभी पानी से लबालब रहने वाला तुमड़िया जलाशय 46 साल में पहली दफा सूखा है।

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जलाशय में पानी नहीं है तो उससे जुड़ी नहरें भी सूखी पड़ी हैं। जिसके चलते यूपी और उत्तराखंड की हजारों एकड़ भूमि में सिंचाई का संकट और गहरा गया है। पानी के अभाव में जलाशय में बड़ी तादाद में मछलियां, जलीय जीव और वनस्पतियां नष्ट हो गई हैं और सूखे के चलते जमीन में दरारें पड़ गई हैं। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से किसान भी परेशान हैं।
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तुमड़िया डैम का निर्माण 1970 में किया गया था। इसका मकसद सिंचाई के लिए यूपी और उत्तराखंड के किसानों को पानी मुहैया कराना था। यह जलाशय 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जलाशय से निकलने वाली तुमड़िया मुख्य नहर, तुमड़िया एक्सटेंशन, बहल्ला, तुमड़िया डैम फीडर से यूपी में 53 हजार 651 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 22 हजार 921 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती है।
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बदलते मौसम के कारण जहां तापमान लगातार बढ़ रहा है, वहीं बारिश भी नहीं हो रही है। पहाड़ों और तराई में बारिश के अभाव में पहली बार तुमड़िया जलाशय सूखा है। जिसकी सीधी मार जलाशय के पानी से सिंचाई को निर्भर यूपी और उत्तराखंड के किसानों पर पड़ी हैं।

वर्तमान में बेमौसमी धान, गन्ना, सब्जियों, चारे के लिए पानी की जरूरत होती है। लेकिन, अब जलाशय सूखने से किसानों के समक्ष सिंचाई के लिए संकट गहरा गया है। किसानों की समक्ष में नहीं आ रहा कि वे अपने खेतों की सिंचाई किससे करें। फिलहाल पानी के अभाव में हजारों एकड़ में लगी फसलों के सूखने का खतरा बढ़ गया है।

गूंजते थे करलव, मंडराते थे पक्षी

tumariya pond drought
tumariya pond drought - फोटो : amar ujala

तुमड़िया जलाशय में हमेशा पानी भरा रहने की वजह से रंगबिरंगी अनेकों प्रजातियों के पक्षियों के करलव सुनाई पड़ते थे। कई प्रजातियों का तो जलाशय में डेरा रहता था। इसके अलावा कई पक्षी, कीट जलाशय में पाई जाने वाली मछलियों, जलीय जीव और वनस्पतियों को खाने के लिए उड़ते रहते थे।

जलाशय के किनारे हरीभरी वनस्पतियों पर मंडराती रंगबिरंगी तितलियां मन मोह लेती थीं। लेकिन, अब जब जलाशय सूख चुका है तो वहां सन्नाटा पसरा है। पानी के अभाव में वनस्पतियां सूखी, जलीय जीव मरे और पक्षियों ने ठिकाना बदल लिया। 

मछलियां मरी, ठेकेदार को तगड़ा नुकसान
जलाशय में मछलियों के ठेकेदार इरशाद अहमद कहते हैं कि जलाशय में पानी सूखने से करोड़ों का नुकसान उठना पड़ा है। पिछले ही साल उन्होंने जलाशय में रोहू, ग्रास सहित अनेक प्रजातियों के 50 लाख रुपये के बीज डाले थे। एक साल में मछलियां तैयार होतीं, लेकिन उससे पहले ही पानी सूखने से सारी मछलियां मर गईं। जलाशय में पानी सूखने से धंधा चौपट हो गया है। उनके पास जलाशय में पांच साल के लिए ठेका है।

छोटे किसानों पर पड़ेगी ज्यादा मार
काशीपुर। जलाशय का पानी सूखने से सबसे ज्यादा मार छोटे किसानों को पड़ रही है। बड़े किसानों ने तो सिंचाई के लिए खेतों में ट्यूबवेल लगा रखे हैं। लेकिन, छोटे किसान आज भी सिंचाई के लिए नहरों पर ही निर्भर हैं। अब जब जलाशय में पानी ही नहीं है तो सीधा खामियाजा भी इन्हीं किसानों को भुगतना पड़ेगा। 

जलाशय के पानी से काशीपुर, धामपुर, अलीगंज, मुरादाबाद तक सिंचाई होती है। 50 सालों में पहली बार जलाशय सूख चुका है। जिससे सिंचाई पर निर्भर किसानों के लिए संकट होना लाजमी है। पहले जलाशय में पानी कम होने पर कोसी बैराज से पानी ले लिया जाता था, लेकिन कोसी नदी में पानी बहुत कम है।
- आरएस आर्य, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग

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