फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   tree cutting creates problem for dgp

अफसरों की 'बलि' ने बढ़ाई DGP की मुश्किलें

Thu, 17 Apr 2014 11:18 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 17 Apr 2014 11:18 AM IST
विज्ञापन
tree cutting creates problem for dgp

पेड़ काटने के मामले में पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

विज्ञापन


जांच के लिए कई अफसरों की बलि
मामले में कुछ दिन तक विवेचनाधिकारी रहे दारोगा के हलफनामे पर यकीन करें तो मनमुताबिक जांच के लिए कई अफसरों की बलि ली गई। किसी को सस्पेंड किया गया तो किसी का तबादला कर दिया गया।

आरक्षित वन क्षेत्र से पेड़ काटने के मामले में इस शपथपत्र से नया मोड़ आ गया है। वन विभाग ने डीजीपी बीएस सिद्धू के खिलाफ रायपुर रेंज में मामला दर्ज कराया गया था।
विज्ञापन


डीजीपी को समन गए तो उन्होंने भी राजपुर थाने में डीएफओ धीरज पांडे सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और षड्यंत्र सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


डीजीपी की ओर से दर्ज रिपोर्ट की जांच 15 नवंबर 2013 को थाना कोतवाली के उपनिरीक्षक निर्विकार सिंह को सौंपी गई। शपथपत्र के मुताबिक जांच के दौरान ठेकेदार कुलदीप नेगी की गिरफ्तारी का कोई औचित्य नहीं था।

वन विभाग अफसरों पर दबाव

इसके बावजूद पुलिस महानिदेशक ने वन विभाग अफसरों पर दबाव बनाने के लिए कुलदीप को पुलिस अभिरक्षा में लेने के आदेश दिए।

वहीं 20 नवंबर 2013 को पुलिस रिमांड के लिए कुलदीप नेगी को अदालत में पेश किया गया, लेकिन अदालत ने कुलदीप नेगी को पुलिस के सुपुर्द करने से इनकार कर दिया था।

शपथपत्र में लिखा है कि पुलिस महानिदेशक को जैसे ही जानकारी मिली उन्होंने तथ्य की समीक्षा और पूछताछ की।

कुलदीप के 161 के बयान में पावर कट की बात न लिखा पाने और 17 नवंबर को पुलिस रिमांड लेने में नाकाम रहने पर नगर पुलिस अधीक्षक जगदीश चंद्र का तबादला कर दिया गया।

एसएसआई को किया निलंबित
इसके अलावा एसएसआई राकेश रावत को निलंबित कर दिया गया। उनका दून से रुद्रप्रयाग जनपद में तबादला कर दिया गया।

एसआई ने निर्विकार ने शपथ पत्र में कहा कि मामले में थानाध्यक्ष राजपुर रहे रवि सैनी भी प्रताड़ित किए जा चुके हैं। बयान मनमुताबिक न होने से अब तक 161 के बयान नहीं हो पाए हैं।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शपथ पत्र के आधार पर पुन: जांच के आदेश दे सकते हैं। वे शपथपत्र की सत्यता को जांचने के लिए निर्विकार के 164 के बयान करा सकते हैं।

- चंद्रशेखर तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता

उक्त दरोगा पिछले दिनों निरीक्षक की परीक्षा में फेल हो गया था। फारेस्ट मामले में वह विवेचनाधिकारी रहा ही नहीं। दो-तीन दिन के लिए आईओ के छुट्टी पर जाने के दौरान उसने विवेचना की। दारोगा इस तरह शिकायत कर रहा है तो देखेंगे कि यह अनुशासनहीनता का मामला है या नहीं। मेरी इस दारोगा से मुलाकात तो दूर, कभी फोन पर भी बातचीत नहीं हुई है।
- बीएस सिद्धू, डीजीपी उत्तराखंड

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed