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नई पीढ़ी को बताएंगे कितना जरूरी है हेलमेट
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 24 May 2016 02:27 AM IST
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हेलमेट
- फोटो : प्रतीकात्मक
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दुपहिया वाहन पर दूसरी सवारी को हेलमेट की अनिवार्यता के शासनादेश के बाद शुरू हुई राजनीति की अनदेखी कर परिवहन विभाग अपने फैसले पर अडिग है। विभाग विरोध को दरकिनार कर नई पीढ़ी को हेलमेट की अहमियत के प्रति जागरूक करेगा। विभाग का कहना है कि लोग उन घरों में जाकर पूछें जिनके सदस्य सड़क हादसों के शिकार हुए हैं। हेलमेट से ज्यादा दिक्कत उन लोगों को होने लगती है जो स्कॉर्पियो, होंडा सिटी आदि कारों से चलते हैं। जबकि, इन्हें हेलमेट से कोई लेना-देना नहीं होता।
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लोगों को बताएं दुर्घटनाओं के आंकड़े
परिवहन विभाग ने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर जन-जागरूकता अभियान की कार्ययोजना तैयार कर ली है। इंटरमीडिएट, डिग्री कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में टीम जाकर छात्र-छात्राओं को हेलमेट के प्रति जागरूक करेगी। संस्थानों में हादसों का डेमो दिया जाएगा। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े बताए जाएंगे।
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हादसों में सिर की चोट से मरने वाले 50 फीसदी दुपहिया वाहन सवारों की जान बच सकती थी, यदि वह हेलमेट लगाए होते। आंकड़ों के अनुसार हादसों में 60 फीसदी दुपहिया सवारों को सिर में चोट लगी थी।
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सचिव परिवहन सीएस नपल्च्याल ने बताया कि सबसे ज्यादा जरूरी स्कूली बच्चों को जागरूक करना है। युवा पीढ़ी हादसों का अधिक शिकार होती है। युवाओं को हेलमेट लगाने की आदत पड़ जाएगी तो बहुत हद तक हादसे कम हो जाएंगे। इसमें किसी को कोई नुकसान नहीं मामला सिर्फ आदत पड़ने का है।