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पेंशन पर किन्नरों ने दिया ऐसा जवाब कि 'सन्न' हो गई सरकार

Fri, 26 Feb 2016 04:37 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 26 Feb 2016 04:37 PM IST
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transgender do not want pension.

देहरादून के किन्नरों को सरकारी इमदाद की जरूरत नहीं है। इसका प्रमाण है समाज कल्याण विभाग की ओर से दी जाने वाली पेंशन योजना में विगत एक साल में एक भी आवेदन का न आना।

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पेंशन लेने में दिलचस्पी न लेना दर्शाता है यह समुदाय पहले से ही काफी संपन्न हैं। हालांकि विभाग की ओर से कई बार समुदाय के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की, लेकिन उन्होंने पेंशन लेने से इंकार कर दिया।
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जरूरतमंद लोगों के लिए बजट का रोना रोने वाले समाज कल्याण ने ऐसे समुदाय के लिए पेंशन की शुरूआत की, जो स्वयं ही पेंशन नहीं चाहता। 40 से 60 साल की उम्र के मध्य के किन्नरों को एक हजार मासिक पेंशन को एक साल में एक भी आवेदन नहीं आया।
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जानकार बताते है कि किन्नर भले ही शुभ कार्यों में लोगों के घरों में मांग कर अपना गुजारा पसंद करते है, लेकिन सरकार की ओर से दी जाने वाली इस इमदाद का वे स्वीकार नहीं करते।

यह है योजना

transgender do not want pension.

किन्नर समुदाय को पेंशन योजना के तहत एक हजार रुपये मासिक पेंशन दी जानी है। इसके लिए आयु 40 से 60 वर्ष तक तय की गई है। आवेदक सरकार की ओर से संचालित किन्नर समुदाय के उत्थान को अन्य किसी योजना का लाभ न ले रहा हो।

नहीं चाहिए पेंशन

महिला आयोग की उपाध्यक्ष रजनी रावत का कहना है कि हमारे समाज को पेंशन की जरूरत नहीं है। हम लोग अपना गुजारा कर लेते हैं। हमने विभाग के अधिकारियों से कई बार कह दिया है कि हमें पेंशन नहीं चाहिए। जो जरूरतमंद लोग हैं, उनके लिए यह योजना चलाई जाए।

नहीं मालूम कितने है किन्नर

विभाग ने तो योजना तो शुरू की, लेकिन दून में किन्नरों की संख्या कितनी है। यह जानकारी भी विभाग के पास नहीं है।

कई बार महिला आयोग की उपाध्यक्ष रजनी रावत से बात की गई है कि किन्नरों की संख्या बताए। लेकिन अभी तक उन्होंने इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए। पेंशन के लिए समुदाय को थोड़ा प्रेरित करने की जरूरत है। उम्मीद है जल्द कुछ किन्नरों को इसका लाभ दिया जाएगा।
- जीआर नौटियाल, डिप्टी डायरेक्टर, समाज कल्याण

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