तबादला नियमावली पर दो मंत्रियों की तनातनी
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माध्यमिक शिक्षा की तरह तबादला नियमावली बनाकर महाविद्यालयों के शिक्षकों को आत्महत्या के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। तबादलों को थोपा नहीं जाएगा, इसके लिए अवसर मिलेंगे। यह कहना है प्रदेश की वित्त एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा हृदयेश का।
वे दून विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की दशा और दिशा पर आयोजित महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक को संबोधित कर रही थीं। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा में तबादला नियमावली के लिए जो सुझाव दिए गए थे वे विफल साबित हुए हैं।
यह नियमावली अब तक कैबिनेट में नहीं आई। शिक्षकों की इस तबादला नियमावली को उन्होंने केवल समाचार पत्रों में पढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह नियमावली उनकी समझ में नहीं आई। उच्च शिक्षा में वे इस तरह की तबादला नियमावली बनाकर किसी को आत्मदाह के लिए मजबूर नहीं करेंगी। महाविद्यालयों में जो नए शिक्षक हैं वे पहाड़ का आनंद लें। प्रयास किया जाएगा कि सबको सुविधा मिले, लेकिन तबादलों के नाम पर पहाड़ के महाविद्यालयों को खाली नहीं होने दिया जाएगा।
‘आत्महत्या करने वाले को कौन रोक सकता है’
शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि तबादल नियमावली कैबिनेट की मंजूरी के बाद बनी है। मुख्यमंत्री ने इसमें संशोधन विचलन से किया है, जो उनका विशेषाधिकार है।
उच्च शिक्षा मंत्री की टिप्पणी पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो आत्महत्या करना चाहता है, उसे कौन रोक सकता है। यह नियमावली प्रदेश के विकास और जनहित को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में पहले तबादला उद्योग चल रहा था, लेकिन नियमावली बनने से इस पर रोक लगी है। अब कुछ लोग अपने चहेतों के नियम विरुद्ध तबादले नहीं करवा पा रहे हैं। नियमावली में जो संशोधन किया गया है वे शिक्षक संगठनों के सुझाव पर किया गया है। इससे निश्चित रूप से तबादला उद्योग रुकेगा और नियम विरुद्ध तबादले नहीं हो पाएंगे।