फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   transfer of paramilitary teacher wife.

अर्द्धसैनिकों की पत्नियों संग उत्तराखंड में 'अन्याय'

Fri, 26 Dec 2014 01:00 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 26 Dec 2014 01:00 PM IST
विज्ञापन
transfer of paramilitary teacher wife.

उत्तराखंड में शिक्षकों की संशोधित तबादला नियमावली में सैनिकों की पत्नियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पुत्रियों को स्थानांतरण से छूट दी गई है। ये अब अनुरोध के आधार पर सुगम में तबादला ले सकेंगी। लेकिन, नियमावली में प्रदेश के अर्द्धसैनिकों की शिक्षिका पत्नियों की कोई सुध नहीं ली गई है।

विज्ञापन


प्रदेश में हजारों की संख्या में अर्द्धसैनिक हैं, जो असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) जैसे बलों से जुड़े हुए हैं।
विज्ञापन


सरकारी स्तर पर उन्हें या उनके परिजनों को सैनिकों के मुकाबले कम सुविधाएं मिलती हैं। अब तबादला नियमावली में अर्द्धसैनिकों की शिक्षिका पत्नियों के लिए प्रावधान न होने पर भी सवाल उठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व सैनिक अर्द्धसैनिक संयुक्त संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एसएस पांगती (रिटायर्ड आईएएस) का कहना है कि देश की सीमा पर जिन परिस्थितियों से सैनिकों को गुजरना पड़ता है, ठीक उन्हीं हालात से अर्द्धसैनिक भी जूझते हैं। ऐसे में उनकी अनदेखी करना गलत है।

महासचिव पीसी थपलियाल कहते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए अर्द्धसैनिकों के परिजनों से भी दोयम व्यवहार किया गया। उन्होंने मांग की कि सरकारी योजनाओं में अर्द्धसैनिकों को सैनिकों के समान सुविधाएं व लाभ मिलने चाहिए।

यह पहली सरकार है जिसने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुत्री और सैनिक की पत्नी शिक्षिकाओं को तबादलों में छूट दी है। अर्द्धसैनिकों के मामले पर भी विचार करेंगे।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री

कैंटीन व उपचार तक की सुविधा नहीं

transfer of paramilitary teacher wife.

उत्तराखंड से लगभग एक लाख जवान विभिन्न अर्द्धसैनिक बलों में तैनात है। केंद्र सरकार के दिशानिर्देश के बावजूद अर्द्धसेना बलों को सेना के समान सुविधाएं देने में उत्तराखंड नाकाम रहा है। शिक्षकों की तबादला नीति में उनके आश्रितों की अनदेखी तो छोटी मिसाल है। हालत यह है कि इनको कैंटीन और सैन्य अस्पताल में उपचार तक की सुविधा नहीं है।

पूर्व केंद्रीय बल पर्सनल के तहत उन्हें लाभ दिए जांय तो सैनिक कल्याण से संबंधित हर योजना में उनकी हिस्सेदारी रहेगी। पर राज्य सरकार के पास ऐसा कोई आकंड़ा नहीं है जिससे स्पष्ट हो पाए कि राज्य से कितने अर्द्धसैनिक हैं। इसके लिए डेढ़ वर्ष से चल रही प्रक्रिया अभी तक कागजों में है।

कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के अधीन एक विभागीय ढांचा तैयार कर सेवानिवृत्त अर्द्ध्र सैनिकों का चिह्नीकरण होना है, जिसमें अब तक पत्राचार हो रहा है। शासन मामले को सैनिक कल्याण निदेशालय में भेज रहा है जबकि निदेशालय ने प्रक्रिया स्पष्ट न होना बता मामला वापस कर दिया।

ये मिलने चाहिए लाभ
- उपनल के माध्यम से आश्रितों को रोजगार
- पूर्व सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली छात्रवृति योजना का लाभ
- पूर्व सैनिकों की बेटियों को मिलने वाली विवाह अनुदान का लाभ
- 60 से 65 वर्ष तक के पुन: रोजगार के पदों पर लाभ
- नियमित नौकरियों में सेवानिवृत्त कोटे की तरह आरक्षण
- सेना की भांति पुलिस गैलेंट्री पदक हासिल करने वालों को धनराशि

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed