पर्यटकों से गुलजार होगी दारमा घाटी, 64 भवनों को होम स्टे के लिए किया चयनित
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कुमाऊं मंडल विकास निगम ने धारचूला की दारमा घाटी के चार गांवों दांतू, दुग्तु, बालिंग और नागलिंग के 64 भवनों को होम स्टे के लिए चयनित किया है। इन गांवों के ग्रामीणों को मुनस्यारी के सरमोली गांव में प्रशिक्षण भी दिया गया है। यदि केएमवीएन की पहल रंग लाई तो आने वाले समय में दारमा घाटी में पर्यटन के द्वार खुलेंगे और घाटी पर्यटकों से गुलजार हो जाएगी।
केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल की पहल पर दारमा घाटी को होम स्टे के लिए तैयार किया जा रहा है। दारमा, व्यास, चौंदास में दारमा ही अकेली घाटी है जो वर्तमान में सड़क से जुड़ी है। पर्यटक और ट्रेकर धारचूला से 80 किमी दूर दुग्तु तक वाहन से और वहां से चार घंटे का पैदल रास्ता तय कर पंचाचूली के बेस कैंप पहुंचेंगे। यहां नागलिंग धुरा, बालिंग ग्लेशियर तो हैं ही, साथ ही मिलम से पंचाचूली हिमालय का दिलकश नजारा पर्यटकों को देखने को मिलेगा।
केएमवीएन की पहल पर ग्रामीण होम स्टे में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। दांतू गांव से 10 महिलाएं, आठ पुरुष, दुग्तु में 16, बालिंग और नागलिंग में 15-15 परिवारों ने होम स्टे के लिए पर्यटन विभाग को आवेदन किया है। चयनित ग्रामीणों में से अधिकतर ने अपने भवनों में रंग-रोगन भी कर दिया है।
होम स्टे के लिए यह हैं नियम
होम स्टे कराने वाले परिवार पर्यटकों की पूरी हिफाजत करेंगे। उनका पूरा नाम, पता रजिस्टर में दर्ज होगा। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था, साफ-सुथरे तरीके से खाना परोसेंगे। पर्यटकों के साथ मेहमान जैसा रिश्ता, होम स्टे की आमदनी से कुछ राशि पर्यावरण संरक्षण के लिए रखी जाएगी। स्थानीय भोजन और संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा।
नवंबर में आएगा 20 पर्यटकों का दल
दारमा घाटी में होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए केएमवीएन काफी दिलचस्पी ले रहा है। निगम के प्रबंधक साहसिक पर्यटन गिरधर मनराल ने बताया पंचाचूली के लिए ट्रेकरों का एक दल निकला है। इससे पहले, चिकित्सकों के एक दल को भी भेजा गया। कोलकाता से छह लोगों का दल अभी निकला है। इसके अलावा नवंबर दूसरे सप्ताह में अहमदाबाद से 20 सदस्यीय दल दारमा होम स्टे के लिए आने वाला है। केएमवीएन दारमा घाटी के लिए पर्यटकों की बुकिंग कर रहा है।
बंगाली पर्यटकों से गुलजार हुई कौसानी, अधिकतर होटल पैक
बागेश्वर और अल्मोड़ा की सीमा पर बसे कौसानी इन दिनों बंगाली पर्यटकों से गुलजार है। यहां अब तक देश-विदेश से 20 हजार से अधिक पर्यटक आ चुके हैं। अधिकतर होटल पैक हैं।
ग्लोबल वार्मिंग के चलते कौसानी अब बारहमासी पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाने लगा है। पहले शरद ऋतु में छोटा पर्यटन सीजन चलता था। केएमवीएन, लोनिवि का राज्य अतिथि गृह और जिला पंचायत के डांक बंगले समेत अधिकतर होटल पैक हैं। पर्यटक सुबह हिमालय की लंबी श्रृंखला पर पड़ने वाली सूरज की सुनहरी किरण और सूर्यास्त की लालिमा के अलावा प्रकृति के अद्भुत नजारों का लुत्फ उठा रहे हैं। होटल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बब्लू नेगी ने बताया कि यदि शासन प्रशासन, समस्याओं का समाधान करे तो यहां पर्यटकों की आमद काफी बढ़ सकती है। थानाध्यक्ष मोहन चंद्र ने बताया पर्यटकों की सुरक्षा के हर संभव प्रयास किए गए हैं।
कौसानी में क्या देखें
- अनाशक्ति आश्रम, लक्ष्मी आश्रम, स्टेट गेस्ट हाउस, राधा कृष्ण मंदिर, चाय बागान फैक्ट्री, पिनाथेश्वर, रुद्राधारी मंदिर, शांति वन के अलावा बैजनाथ धाम और झील।
ठहरने की व्यवस्था
राज्य अतिथि गृह, केएमवीएन पर्यटक आवास गृह, जिला पंचायत का डांक बंगला, कृष्णा होटल, प्रशांत, सुमित, जीतू, हिमालया माउंट व्यू, सुमन, नेचर वैली होटल अठगाड़, हेरिटेज समेत 50 से अधिक होटल हैं।