केदारनाथ के इतिहास में जुड़ा नया अध्याय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदारनाथ घाटी के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। शीतकाल के लिए बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद पहली बार पर्यटकों का दल केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुआ है।
निम की ओर से आयोजित इस ट्रैकिंग एक्सपीडिशन में माई एडवेंचरर्स क्लब के 25 सदस्य प्रतिभाग कर रहे हैं। ये निम के तीन इंस्ट्रक्टर के दिशा-निर्देशन में ट्रैकिंग करेंगे। दल केदारनाथ धाम की भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन कर आपदा व उससे सुरक्षा संबंधी अपने सुझाव भी निम को उपलब्ध कराएगा। दल दस नवंबर को लौटेगा।
निम के दिशा-निर्देशन में बृहस्पतिवार को ‘चलो केदारनाथ अभियान’ के तहत माई एडवेंचरर्स क्लब (मैक) के 25 प्रतिभागी सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए। टीम में राज्य के विभिन्न स्थानों से 22 से 39 आयु वर्ग के प्रतिभागी शामिल हैं।
टीम निम के इंस्ट्रक्टर आमोद पंवार, विनय मोहन तथा धनेंद्र नेगी के दिशा निर्देशन में केदारनाथ रूट की जानकारी लेगा। निम के आमोद पंवार ने बताया कि ट्रैकिंग दल को केदारनाथ की पूर्व व वर्तमान स्थितियों की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा उनसे पुनर्निर्माण के संबंध में सुझाव भी लिए जाएंगे। इससे धाम में संचालित पुनर्निर्माण कार्यों को और बेहतर तरीके से संपादित किया जा सकेगा। वहीं मैक की निदेशक शिवानी गुसाईं ने बताया कि उनका दल हर वर्ष ट्रैकिंग पर निकलता है।
केदारनाथ धाम में निम को 20 जनवरी तक पुनर्निर्माण कार्य करने हैं। ऐसे में केदारनाथ धाम में विंटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए ट्रैकिंग कैंप शुरू करवाया गया है। ट्रैकर्स को निम जरूरी सुविधाएं और सहायता दे रहा है। इस रूट का हमने डिजास्टर रूट रखा है। इससे ट्रैकर्स में रूट को लेकर उत्सुकता पैदा हो।
- कर्नल अजय कोठियाल, प्रधानाचार्य निम
उपेक्षा से आहत लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर शिवानी
लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर शिवानी गुसाईं राज्य सरकार से खफा है। उनका कहना है कि उत्तराखंड में एडवेंचर गेम्स को सरकार की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। इससे इस क्षेत्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ी इन खेलों को करियर नहीं बना पा रहे हैं।
केदारनाथ रूट पर ट्रेकिंग को पहुंची मैक की निदेशक शिवानी गुसाईं ने बताया कि उन्होंने 13 वर्ष की आयु में पैराग्लाइडिंग करने से उनका नाम लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड में है। लेकिन पारिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने से वह इस फील्ड में आगे नहीं बढ़ पाई।
हालांकि उसने कई बार इस संबंध में राज्य सरकार को अवगत कराया, लेकिन किसी भी स्तर से कोई मदद नहीं मिली। शिवानी ने बताया कि सरकार एडवेंचर स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं देती।
ऐसे में उनकी प्रतिभा उपेक्षा के कारण दब जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य में एडवेंचर गेम्स की अपार संभावनाएं हैं। इसे बढ़ावा देने से अन्य राज्यों से भी लोग यहां पहुंचेंगे।