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राजाजी टाइगर रिजर्व में अब पर्यटक नहीं कर पाएंगे हाथी की सवारी, पीछे है ये बड़ी वजह

Tue, 13 Nov 2018 08:46 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Tue, 13 Nov 2018 08:46 AM IST
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Tourist can not Do Elephant ride in Rajaji tiger reserve
राजाजी पार्क - फोटो : AmarUjala

राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज की सैर पर जाने वाले पर्यटक इस बार हाथी की सफारी नहीं कर पाएंगे। विभाग के पास पर्याप्त संख्या में हाथी न होने के कारण हाथी सवारी के लिए पार्क में जाने वाले पर्यटकों को इस बार निराश होना पड़ सकता है। प्राइवेट वाहनों के प्रवेश पर पहले से ही रोक लगाई जा चुकी है। 

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हर साल 15 नवंबर को राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज सहित रानीपुर, मोतीचूर, मोहंड, आशारोड़ी रेंजों के गेट पर्यटकों के लिए खोल दिए जाते हैं। बीते वर्ष 40 हजार 118 भारतीय और एक हजार 751 विदेशी पर्यटकों ने पार्क का दीदार किया था।
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इससे पार्क को करीब 95.97 लाख रुपये की आय हुई थी। वहीं पार्क आने वाले पर्यटकों में जंगल सफारी के लिए हाथी सवारी करने का भारी क्रेज रहता है। विभिन्न राज्यों से पर्यटक हाथी की सवारी करने के लिए भी राजाजी टाइगर रिजर्व का रुख करते हैं, लेकिन इस बार हाथी सवारी के लिए पार्क आने वाले पर्यटकों को मायूस होना पड़ सकता है। 

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बीते वर्ष हुई थी राजा की मौत 

वार्डन अजय शर्मा ने बताया कि पार्क के पास चार हाथी के बच्चे और दो हथनियां (राधा और रंगली) हैं। मोतीचूर रेंज में एक गुलदार की आबादी वाले इलाके में चहलकदमी बढ़ गई है। इस कारण दोनों हथनियों को मोतीचूर में गश्त के लिए लगाया गया है। रोजाना गुलदार की मॉनिटरिंग की जाती है और हथनियों के साथ गश्त की जाती है। इस कारण इस बार पार्क में हाथी सवारी नहीं कराई जाएगी।  

वन विभाग को वर्ष 1993 में रेलवे ट्रैक समीप एक हाथी का बच्चा मिला था। इसे राजाजी पार्क को सौंप दिया गया और उसका नाम राजा रखा गया। राजा को ट्रेनिंग दी गई और बाद में राजा को पर्यटकों को सवारी कराने अथवा गश्त के कार्यों में उपयोग किया जाता रहा, लेकिन बीते वर्ष जंगली हाथी के साथ आपसी संघर्ष में राजा की मौत हो गई थी। इस कारण विभाग के पास फिलहाल पर्यटकों को सवारी कराने के लिए हाथी नहीं है।  
 

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