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चार सालों में उत्तराखंड में बढ़े 50 फीसदी बाघ

Wed, 21 Jan 2015 03:24 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 21 Jan 2015 03:24 PM IST
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tiger population increased in uttarakhand.

उत्तराखंड में बाघों की संख्या में लगभग 50 फीसदी के इजाफे ने राज्य सरकार के साथ ही सूबे के वन्य क्षेत्र और पार्क प्रशासकों के चेहरे खिला दिए हैं। पिछले चार साल में उत्तराखंड में बाघों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

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दिल्ली में रिपोर्ट जारी होने के बाद प्रदेश के वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने प्रेस वार्ता बुलाकर नए आंकड़े जारी किए। प्रदेश में बाघों की संख्या 227 से बढ़कर 340 पर पहुंच गई है। वन मंत्री ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब इन बाघों के संरक्षण के लिए एनटीसीए से बजट बढ़ाने की मांग की जाएगी।
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एनटीसीए की ओर से मंगलवार को जारी की गई ‘स्टेटस आफ टाइगर्स इन इंडिया रिपोर्ट 2014’ में उत्तराखंड के आंकड़ों ने पूरे देश को चौंका दिया। 2010 की बाघ गणना में पूरे देश में उत्तराखंड तीसरे स्थान पर था, लेकिन 2014 की रिपोर्ट ने दूसरे स्थान पर ला दिया।
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कार्बेट टाइगर का प्रबंधन उत्तम

tiger population increased in uttarakhand.

प्रमुख वन संरक्षक एसएस शर्मा ने बताया कि विश्व में सर्वाधिक बाघ कार्बेट टाइगर रिजर्व में हैं। केंद्र सरकार ने 2014 में हुए मूल्यांकन में कार्बेट टाइगर रिजर्व का प्रबंधन अति उत्तम पाया है।

2010 की बाघ गणना में कार्बेट टाइगर रिजर्व में 216 और राजाजी राष्ट्रीय पार्क के 11 बाघों को मिलाकर कुल संख्या 227 थी। इस बार यह आंकड़ा आना बाकी है। इस मौके पर मुख्य वन संरक्षक डा. धनंजय मोहन भी मौजूद रहे।

शिकारियों ने 14 बाघों का बनाया निशाना
प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ने पर सरकार और वन महकमा बेशक खुशी से झूम रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इज्जत किस्मत से बची है।

आलम यह है कि प्रदेश में न तो स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) का गठन हो पाया है और न ही बाघ बहुल इलाकों में खास सुरक्षा व्यवस्था है। पिछले चार वर्षों में प्रदेश में 14 बाघ शिकारियों का निशाना बने।

देश में बढ़े बाघ, 2226 पहुंची तादात

tiger population increased in uttarakhand.

वन्य जीव प्रेमियों के लिए 2015 बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। 2010 से 2014 तक देश भर में बाघों की संख्या में 30.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2010 में बाघों की संख्या 1706 थी जो बढ़कर 2226 हो गई है। 2006 में यह आंकड़ा महज 1411 था।

मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ‘स्टेटस ऑफ टाइगर्स इन इंडिया रिपोर्ट 2014’ रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक 18 बाघों वाले राज्यों के कुल तीन लाख 78 हजार 118 वर्ग किलोमीटर जंगलों में एक साथ सर्वेक्षण किया गया।

कर्नाटक, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बाघों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2010 में 300 बाघों के साथ कर्नाटक पहले स्थान पर था। इस वर्ष भी 406 बाघों के साथ कर्नाटक अव्वल है।

वर्ष 2010 में मध्य प्रदेश 257 बाघों के साथ देश में दूसरे स्थान पर था, लेकिन नई सूची में 308 बाघों के साथ तीसरे स्थान पर आ गया है। वर्ष 2010 में 227 बाघों के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहा उत्तराखंड 340 बाघों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

बाघों की संख्या

tiger population increased in uttarakhand.

प्रदेश - 2006 - 2010 - 2014
कर्नाटक - 290 - 300 - 406
उत्तराखंड - 178 - 227 - 340
मध्य प्रदेश - 300 - 257 - 308

बेहतर माहौल है बढ़ोतरी की वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक देशभर में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी की मुख्य वजह बेहतर वासस्थल हैं। शांत माहौल होने की सूरत में हर दो साल में वयस्क बाघिन तीन से चार बच्चे पैदा करती है।

दो साल तक इनकी परवरिश के बाद दोबारा बच्चों को जन्म देती है। विशेषज्ञों के हिसाब से इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बेहतर माहौल ही है। इसके अलावा कहीं न कहीं देशभर में ही बाघ के शिकार पर भी लगाम लगी है।

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