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बाघ ने बच्चे को मारा तो हथिनी हुई आगबबूला, मचाया कोहराम

Tue, 16 Jun 2015 08:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार (पौड़ी)
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटद्वार (पौड़ी) Updated Tue, 16 Jun 2015 08:50 PM IST
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tiger killed the child, elephants become angry.

पौड़ी के लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज में सोमवार की शाम बाघ ने हाथी के बच्चे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। बच्चे पर हमला करते देख हाथियों ने बाघ को जंगल में दौड़ा लिया। घटना से गुस्साई हथिनी ने चिंघाड़ कर आसमान सिर पर उठा लिया। मौके पर पहुंचे वनकर्मियों और ग्रामीणों को भी हथिनी ने दूर तक दौड़ा दिया।

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वन कर्मियों को शिशु हाथी का शव कब्जे में लेने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बच्चे के मरने के कई घंटे बाद तक हथिनी शव के पास खड़ी रही। मंगलवार सुबह वन कर्मियों ने हाथी के बच्चे को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराकर दफना दिया।
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कोटद्वार रेंज के अंतर्गत तेलीस्रोत के पास सिगड्डी कंपार्टमेंट संख्या 18बी के जंगल में हाथी के झुंड के साथ एक बच्चा भी चल रहा था। इस बीच पीछे से आए बाघ ने करीब एक माह के हाथी के बच्चे पर हमला कर दिया। उसने बच्चे पर नाखून और दांत से कई जगह वार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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बच्चे पर बाघ को हमला करते देख हथिनी ने कोहराम मचा दिया। उसने बाघ को दूर तक दौड़ा दिया। इससे बाघ उसे निवाला नहीं बना सका।

बच्चे का शव उठाते ही दौड़ पड़ती थी हथिनी

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जंगल से घासपत्ती लेकर आते लोगों ने हाथी के बच्चे को घायल अवस्था में देखा तो इसकी सूचना वन कर्मियों को दी। रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि शिशु हाथी करीब एक माह का था। शरीर पर गहरे जख्म होने से देर रात उसकी मौत हो गई। हाथी के बच्चे के मरने की खबर फैलने पर उसे देखने के लिए जंगल में भीड़ जमा हो गई।

हाथी के झुंड ने ग्रामीणों और वन कर्मियों को दूर तक दौड़ा दिया। हथिनी के दूर हटने पर वन कर्मियों ने शिशु हाथी के शव को कब्जे में लिया तो झाड़ी की आड़ में खड़ी हथिनी ने उन्हें भी दौड़ा दिया। इससे मौके पर अफरातफरी मच गई।

लोगों ने आनन-फानन में जंगल के बाहर दौड़ लगाकर जान बचाई। काफी समय बाद जब हथिनी जंगल की ओर चली गई, तब जाकर वन कर्मियों ने हाथी के बच्चे को उठाया।

जंगल में न जाएं, हथिनी कर सकती है हमला

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लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ नितीशमणी त्रिपाठी ने लोगों को आगाह किया है कि वह गूलरझाला बीट में न जाएं। उनका कहना है कि बच्चे की मौत से हथिनी गुस्से में है। ऐसे में जंगल में जाना खतरे से खाली नहीं है, हथिनी जानलेवा हमला कर सकती है।

पहले भी पाखरो में इसी प्रकार हाथी के बच्चे की मौत हो गई थी। इसके कारण हथिनी ने आतंक मचा दिया था, जिसके कारण कई दिन तक कोटद्वार-कालागढ़ मार्ग बंद करना पड़ा था। उन्होंने लोगों से जंगल में न जाने और निकटवर्ती क्षेत्र के लोगों से सचेत रहने की अपील की है।

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