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जंगल में कुत्ते कर रहे हैं बाघों का 'शिकार'

Thu, 18 Sep 2014 09:15 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 18 Sep 2014 09:15 PM IST
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tiger being killed by a virus.

शिकारियों से बचाव के लिए तो बाघों को स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स मिल गई है, लेकिन एक कुदरती वायरस उनकी जान का दुश्मन बन गया है। हाल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार कुत्तों में होने वाली घातक बीमारी कैनाइन डिस्टेंपर से देश के बाघों पर खतरा मंडरा रहा है।

दरअसल, बाघ अक्सर शिकार की तलाश में पालतू कुत्तों पर हमला करते हैं, लेकिन यह वायरस इतना खतरनाक है कि बीमार कुत्ते के नजदीक जाने से ही बाघ को संक्रमित कर डालता है। डिस्टेंपर की वजह से कुछ बाघों की मौत और कुछ के बीमार होने के मामले सामने आने के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने देश के छह टाइगर रिजर्व को अलर्ट किया है।

आदेश दिया गया है कि रिजर्व के आसपास स्थित सभी गांवों के सभी पालतू, आवारा कुत्तों का वैक्सीनेशन कराया जाए। एनिमल बर्थ कंट्रोल का भी आदेश दिया गया है। इसके अलावा रिजर्व में बाघों की स्थिति पर भी नजर रखने के लिए कहा गया है। कर्नाटक में पहले से ही काम चल रहा है।

यहां मामले आए सामने

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कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व में कुत्तों के इस वायरस से बाघों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। वहां तत्काल बाघों के बचाव का काम शुरू किया जा चुका है। आसपास के 120 गांवों में कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। कुछ अन्य रिजर्व में बाघों की मौत भी हुई है। हालांकि, इनकी संख्या स्पष्ट नहीं है।

इन छह टाइगर रिजर्व पर भी खतरा

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-रणथंभौर टाइगर रिजर्व, राजस्थान
-कार्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड
-कान्हा टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश
-तंबोड़ा-अंधेरी, महाराष्ट्र
-मुदुमलै टाइगर रिजर्व, तमिलनाडु
-पन्ना टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश

क्या है यह बीमारी, जानिए सबकुछ

tiger being killed by a virus.

कुत्तों में दो ही जानलेवा बीमारियां होती हैं, रैबीज और कैनाइन डिस्टेंपर। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से प्रभावित कुत्ते को तेज बुखार, आंख और नाक से पानी बहना, उल्टी होने के अलावा उनके पैर और नाक का हिस्सा सख्त होता जाता है। इसके बाद कुत्ते को लकवा मार जाता है और वह चलने लायक नहीं रह जाता। पैरालाइज होने के सात से दस दिन बाद कुत्ते की मौत हो जाती है।

इंसानों को नहीं खतरा
कुत्तों की इस जानलेवा बीमारी से इंसानों को खतरा नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बीमारी इंटर स्पीसीज होती है, यानी पशुओं में ही फैलती है। दूसरी ओर, कुत्तों की ही बीमारी रैबीज मनुष्यों के लिए भी घातक होती है।

अफ्रीका में मरे थे बाघ
40 वर्ष पहले अफ्रीका के बाघों में भी कुत्तों से यह बीमारी फैली थी। वायरस के प्रभाव में आने से वहां करीब दो सौ बाघ मारे गए थे। दुनिया भर में डिस्टेंपर से बाघों की मौत का यह सबसे बड़ा मामला है।

इनमें भी फैलता है वायरस
कैनाइन डिस्टेंपर का रोग कुत्तों से भेड़ियों और लोमड़ी में भी फैलता है। डिस्टेंपर का वायरस सिंगल स्टैंडर्ड आरएनए होता है, लिहाजा यह कुत्तों से इसकी नजदीकी प्रजातियों (लोमड़ी, भेड़िया, जंगली कुत्तों आदि) में आसानी से चला जाता है। इसके अलावा यह बिल्ली प्रजाति पर भी हमला करता है।

विशेषज्ञों का है कहना

tiger being killed by a virus.

एनिमल हस्बेंडरी डिपार्टमेंट और एनजीओ के साथ मिलकर टाइगर रिजर्व के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में कुत्तों की वैक्सीनेशन और बर्थ कंट्रोल का एनटीसीए ने फैसला किया है। इस संबंध में सभी को निर्देशित कर दिया गया है।
-डा. राजेश गोपालन, सदस्य सचिव, एनटीसीए

कैनाइन डिस्टेंपर बेहद गंभीर बीमारी है। देश में मरे कुछ बाघों में इस बीमारी के लक्षण भी मिले हैं। यह बीमारी न केवल कुत्ते से कुत्ते को फैलती है, बल्कि बिल्ली प्रजातियों के जीव जैसे बाघ, गुलदार आदि में भी यह वायरस आसानी से प्रवेश कर जाता है।
-राहुल सहगल, निदेशक, एशिया ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल इंडिया, अहमदाबाद।

कैनाइन डिस्टेंपर की रोकथाम से संबंधित एनटीसीए के निर्देश हमें मिल चुके हैं। इस मामले पर विभाग ने वेटरीनरी डिपार्टमेंट से भी बातचीत कर ली है। जल्द ही अभियान चलाकर कार्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जाएगा।
-डीबीएस खाती, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक, उत्तराखंड।

कार्बेट के पास 7500 कुत्ते
कार्बेट टाइगर रिजर्व वर्ष 2008 की बाघगणना में देश में दूसरे स्थान पर है। तब यहां 160 बाघ देखे गए थे। कार्बेट के चारों ओर दो किलोमीटर के दायरे में करीब 40 गांव स्थित हैं। यहां कुत्तों की संख्या करीब 7500 है।

 

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी- aftaba@ddn.amarujala.com या इस नंबर- 8392922180 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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