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उत्तराखंड:तीन शिक्षकों की बीएड की डिग्री निकली फर्जी, देश के इस नामी विवि से जारी हुई थीं ये डिग्री

Tue, 27 Feb 2018 10:47 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 27 Feb 2018 10:47 PM IST
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Three teachers BEd degree found fake in uttarakhand
रिपोर्ट - फोटो : amar ujala

शिक्षा विभाग में अमान्य डिग्री से नियुक्तियों के मामले में एसआईटी जांच में हरिद्वार के तीन शिक्षकों की बीएड डिग्री फर्जी पाई गई है। यह डिग्री दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर से जारी होना दर्शाई गई थी।

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विश्वविद्यालय के नाम से फर्जी लेटर जारी कर एसआईटी को गुमराह करने की कोशिश हुई। हालांकि विश्वविद्यालय की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने शिक्षा विभाग को मुकदमे की सिफारिश की है।
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एसआईटी जांच में तीन और शिक्षकाें की डिग्री फर्जी होने की पुष्टि हुई है। तीनों शिक्षक हरिद्वार जिले में तैनात हैं। एसआईटी को राजकीय प्राथमिक विद्यालय रोलाहेड़ी, भगवानपुर के शिक्षक सौकेन्द्र कुमार, राजकीय प्राथमिक विद्यालय शाहपुर की सहायक अध्यापक पूनम सिंह उर्फ पूनम धीमान और राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक विमल कुमार की बीएड की डिग्री फर्जी होने की शिकायत मिली थी।
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एसआईटी ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी के माध्यम से उनकी हाईस्कूल, इंटर और बीएड की डिग्री प्राप्त कर उनका सत्यापन कराने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय भेजा था। परीक्षा नियंत्रक की तरफ से अक्तूबर में एसआईटी को बताया गया कि बीएड की डिग्री की जांच को समिति गठित कर दी गई है।

इसी बीच गोरखपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की तरफ से दो फर्जी लेटर भी आए, जिनमें इनकी डिग्री को सही करार दिया गया। लेकिन जब एसआईटी प्रभारी एवं सीबीसीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक से बात की तो इस तरह का कोई पत्र जारी न करने की बात सामने आई।

छह नवंबर को आया पहला फर्जी लेटर

Three teachers BEd degree found fake in uttarakhand
डेमो - फोटो : डेमो
गोरखपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की तरफ से एसआईटी को भेजे पत्र में जानकारी दी गई कि सौकेन्द्र कुमार की वर्ष 1999, विमल कुमार की वर्ष 1999 और पूनम की वर्ष 1994 की बीएड की डिग्री पूरी तरह फर्जी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी प्रभारी ने महानिदेशक शिक्षा को हरिद्वार के तीनों शिक्षकाें के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की सिफारिश की है।

बीएड की डिग्री को लेकर एसआईटी की आंखाें में धूल झोंकने की एक नहीं दो बार कोशिश की गई। मामला गंभीर होने के कारण एसआईटी बराबर गोरखपुर विश्वविद्यालय के संपर्क में रही। पहले से इस तरह के फर्जीवाड़े की आशंका थी।

छह नवंबर को आया पहला फर्जी लेटर
दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के नाम से पहला फर्जी पत्र डाक से प्राप्त हुआ था। जिसके माध्यम से अवगत कराया गया था कि सौकेन्द्र कुमार, पूनम और विमल कुमार ने बीएड प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की है।

एसआईटी की टीम खुद दस्तावेजों का अवलोकन करके आई थी। जांच में दस्तावेजों में छेेड़छाड़ की भी बात सामने आई थी। साफ तौर से बीएड की डिग्री पूरी तरह फर्जी है। तीनों शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की सिफारिश महानिदेशक शिक्षा से की गई है।
- श्वेता चौबे, एसआईटी प्रभारी, अपर पुलिस अधीक्षक, सीबीसीआईडी।

 

एसआईटी चक्रव्यूह में अब तक फंसे 27 शिक्षक

Three teachers BEd degree found fake in uttarakhand
गोरखपुर विश्वविद्यालय

गोरखपुर विश्वविद्यालय का पहला जवाब
गोरखपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक द्वारा 13 दिसंबर को आशंका जताई गई कि विश्वविद्यालय में कार्यरत किसी कर्मचारी की भी इस फर्जीवाड़े में संलिप्तता हो सकती है, क्योंकि विश्वविद्यालय की तरफ से कोई पत्र नहीं जारी किया गया।

चार जनवरी को दूसरा फर्जी पत्र मिला
गोरखपुर विश्वविद्यालय के नाम से चार जनवरी को एक और फर्जी पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें छह नवंबर के  पत्र का हवाला देते हुए पहली सूचनाआें को सत्यापित किए जाने की बात कही गई। यह भी कहा गया कि भविष्य में इस प्रकरण को अंतिम समाप्त और बंद किया जा रहा है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय का दूसरा जवाब
एसआईटी ने सात जनवरी को इस पत्र को लेकर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक से दूरभाष पर संपर्क किया तो पता चला कि उनके द्वारा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। समिति की जांच अभी चल रही है, कोई परिणाम अभी नहीं आया है।

एसआईटी चक्रव्यूह में अब तक फंसे 27 शिक्षक
एसआईटी जांच में अब तक प्रदेश के करीब 27 शिक्षकों की डिग्री अमान्य पाई जा चुकी है, जिनके खिलाफ अभियोग दर्ज होने के साथ विभागीय कार्रवाई प्रचलित है। अमान्य डिग्री वाले सबसे ज्यादा शिक्षक हरिद्वार जिले के पाए गए हैं। बता दें कि हरिद्वार जिले के ही करीब एक दर्जन शिक्षकाें के मूल निवास और जाति प्रमाण पत्रों की जांच भी चल रही है। गड़बड़ी की आशंका के चलते जिलाधिकारी द्वारा जांच के लिए अलग से समिति बनाई गई है।

 

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