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प्रदेश के तीन मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 16 Dec 2014 09:54 AM IST
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केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के तीन मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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यह बनेंगे राष्ट्रीय राजमार्ग
इसका प्रस्ताव राज्य सरकार ने भेजा था। इन मार्गों में पुरकाजी-लक्सर-हरिद्वार मार्ग (46.5 किलोमीटर), कुंड-ऊखीमठ-गोपेश्वर(84 किलोमीटर) चोपता होते हुए और पनार-गंगोलीहाट-चकौड़ी-बेनीनाग-बागेश्वर(208 किलोमीटर) मार्ग शामिल हैं। यह जानकारी सचिव लोकनिर्माण विभाग अमित नेगी ने दी।
अमित नेगी ने बताया सालों से वन स्वीकृति में उलझी राज्य की करीब 1261 सड़कें चार चरण में पूरी की जाएंगी। केंद्र से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने वाले और अन्य 260 मार्गों से संबंधित सभी औपचारिकता 31 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएंगी। जिलों में नियमित समीक्षा कर 15 फरवरी तक सभी लंबित मामलों का निस्तारण कर लिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि प्रत्येक शुक्रवार को जिलाधिकारी शाम तीन बजे वन विभाग की स्वीकृति से जुड़े मामलों पर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। वहीं 15 दिन में एक बार वीडियो कांफ्रेंसिंग से समीक्षा होगी। उन्होंने बताया कि वन स्वीकृति के लिए 11 चरण पूरे करने होते हैं।
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व्यवस्था ऑनलाइन होने और पांच हेक्टेयर की छूट के बाद स्वीकृति मिलने में तेजी आई है। वन विभाग और लोकनिर्माण विभाग केबीच सहयोग और बेहतर हुआ है। उन्होंने बताया कि करीब 70 फीसदी मामले 70 हेक्टेयर की परिधि में है जिनका निस्तारण यहीं से हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी जिलों में कुल 6 हजार किलोमीटर नई सड़क बनेंगी।
पहली अप्रैल से सड़क पीडब्ल्यूडी की
पहली अप्रैल से 2015 से बीआरओ के अधीन ऋषिकेश-रुद्रप्रयाग मार्ग, रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड और टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग को सुपुर्द कर दिया जाएगा।
इसके लिए विभाग तीन परिक्षेत्र लोहाघाट, श्रीनगर और गुप्तकाशी में बना रहा है। बावजूद सड़क परिवहन मंत्रालय ने बीआरओ की हैवी मशीनरी के इस्तेमाल के लिए 22 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए हैं। कई जगहों पर बीआरओ अपनी जमीन भी मुहैया कराएगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग के लाभ
- सड़क वर्तमान चौड़ाई से अधिक चौड़ी हो जाएगी।
- सड़क के आधार को भी अधिक मजबूती दी जाती है। साथ हर तीसरे साल उस पर नई परत चढ़ाई जाती है। जबकि राज्य के अधीन सड़क प्रत्येक चार साल और गांव व अन्य सड़कें पांच साल में बनती हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से केंद्र से मरम्मत केलिए हर साल धन स्वीकृत होता है। जबकि राज्य सरकारें अपने बजट के आधार पर ऐसा कर पाती हैं।
- हरिद्वार में कुंभमेला को देखते हुए लक्सर-पुरकाजी-हरिद्वार मार्ग केलिए केंद्र ने 46 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
आपदा प्रभावित जिलों का अधिकार मिला
राज्य के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने आपदा प्रभावित पांच जिलों के संदर्भ में पांच हेक्टेयर तक के मामलों को स्वीकृति देने का अधिकार एक साल केलिए राज्य सरकार दे दिया है। साथ ही 31 जनवरी तक सभी शेष मामले ऑन लाइन हो जाएंगे। दिसबंर महीने में ही 73 मामले ऑनलाइन किए जा चुके हैं।
2001 से अब तक पुराने मामले भी स्वीकृति
वर्ष 2001 से 2011 के बीच 1401 और वर्ष 2012 से नवंबर 2014 तक कुल 201 मार्गों के संबंध में मुख्य सचिव एन.रविशंकर की अध्यक्षता में हुई वीडियो कांफ्रेसिंग बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।
केंद्र की ओर लंबित मामलों में 23 प्रकरण में सैद्धांतिक मंजूरी तथा 152 में सशर्त सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। जबकि पुराने 80 ऑफ लाइन मामलों को भी कुछ आपत्तियों के साथ मंजूरी मिली है। केंद्र से लंबित सभी मामले 31 दिसंबर तक पूरे किए जाने हैं।