उपचार न मिलने से तीन माह की बच्ची की मौत
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तेज बुखार और निमोनिया से पीड़ित तीन माह की बच्ची की उपचार नहीं मिलने से मौत हो गई। चकराता तहसील के बुरास्वा गांव में एएनएम सेंटर पर ताला लटका होने के कारण बच्ची को समय पर उपचार नहीं मिल पाया। उसकी मौत के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
वहीं, बुरास्वा गांव में बीते करीब डेढ़ महीने में चार नवजात शिशुओं की मौत के बाद एक बार फिर जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है।
बुरास्वा गांव के खेड़ा विस्तार में अजीत सिंह का सेब का बगीचा है। यहां नेपाल के रहने वाले भरत बहादुर मजदूरी करते हैं। दो दिन पूर्व उनकी तीन माह की बेटी मुन्नी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्ची को लेकर वह 21 किमी दूर सीएचसी चकराता पहुंचे।
यहां बच्ची का चेकअप कराने और दवा लेने के बाद वह वापस लौट आए। बृहस्पतिवार सुबह अचानक बच्ची की तबीयत फिर से बिगड़ने लगी। हालत नाजुक देख परिजन उसे लेकर एएनएम सेंटर गए।
यहां बीते तीन माह में हो चुकी है कई मौत
लेकिन, वहां ताला लटका होने के चलते बच्ची को फौरी उपचार नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि जनजातीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।
बुरास्वा स्थित मातृ शिशु कल्याण केंद्र में तैनात एएनएम को दो महीने से चकराता अटैच किया गया है। इससे सेंटर में ताला लटका हुआ है। दो किमी दूर स्थित एलोपैथिक अस्पताल मयरावना में भी डॉक्टर नहीं हैं। यदि बच्ची को समय रहते उपचार मिलता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
बुरास्वा गांव में बीते दिनों हुई घटनाएं
18 मई - अजीत सिंह की तीन माह की बुखार से पीड़ित बच्ची की उपचार नहीं मिलने से मौत।
15 मई - प्रसव के बाद समय पर उपचार नहीं मिलने से सीमा देवी के नवजात की मौत।
14 अप्रैल - सविता देवी के तीन माह के बच्चे की तेज बुखार से मौत।
31 मार्च - बबीत रावत के नवजात शिशु की प्रसव के बाद समय पर उपचार नहीं मिलने से मौत।