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इस बार बाबा के भक्त केदारनाथ के बारे में जान सकेंगे कई अनसुनी बातें

Mon, 10 Apr 2017 12:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो्,देहरादून।
अमर उजाला ब्यूरो्,देहरादून। Updated Mon, 10 Apr 2017 12:38 PM IST
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This time Pilgrims will get information of kedarnath deeply
kedarnath - फोटो : amar ujala

केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तराखंड सरकार एक अलग तैयारी कर रहा है। केदारनाथ धाम की महिमा और इससे जुड़ी कई बातें जो कई भक्तों को नहीं मालूम है, के बारे में बताएगी। इसके लिए सरकार ने संस्कृति विभाग को जिम्मेदारी दी है। 

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इसमें गढ़वाली बोली में केदारनाथ से संबंधित बातों को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से सामने रखा जाएगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए सब टाइटल्स की व्यवस्था की जाएगी। गढ़वाली में जैसे जैसे केदारनाथ का वर्णन होगा, वैसे-वैसे हिंदी में भी सारी बातें साफ होती रहेंगी। संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के निर्देश पर इस प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ किया गया है। 
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मंत्रालय संभालने के बाद महाराज ने इस बात को महसूस किया कि लोग केदारनाथ आते है और फिर यहां की गहन जानकारी लिए बिना ही चले जाते हैं। इसलिए उन्होंने प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए। संस्कृति मंत्री शैलेश बगोली के अनुसार, इस बार केदारनाथ में वहां की महिमा के बखान के लिए नई पहल शुरू की जा रही है। संस्कृति निदेशक बीना भट्ट ने बताया कि गढ़वाली में इस प्रोजेक्ट को तैयार किया जा रहा है। कोशिश ये ही है कि इस बार से ही श्रद्धालुओं के लिए ये व्यवस्था शुरू हो जाए।

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ताकि खराब न हो उत्तराखंड की छवि

This time Pilgrims will get information of kedarnath deeply
केदारनाथ - फोटो : AmarUjala

पर्यटन विभाग ने इस बार चार धाम यात्रा को लेकर एक अलग पहल शुरू की है। विभाग के होटल मैनेजमेंट के छात्र यात्रा रूट पर स्थिति होटल-ढाबे वालों को अतिथि सत्कार सिखा रहे हैं। ऋषिकेश से लेकर कौडियाला तक के मार्ग में स्थित होटल-ढाबों को पहले चरण में ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें होटल का स्टाफ अपनी ड्रेस किस तरह की रखे। यात्रियों से किस तरह से बात करें। 

यात्रा शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा यात्रा मार्ग को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। चार धाम यात्रा में रुकने और खाने-पीने के लिए यात्री काफी हद तक प्राइवेट होटल-ढाबों पर निर्भर रहते हैं। जीएमवीएन, बद्री-केदार मंदिर समिति और अन्य संस्थाओं की क्षमताओं की बात की जाए, तो यात्रा में आने वाले यात्रियों की जितनी संख्या होती है, उसकी तुलना में बहुत कम यात्रियों के रुकने, खाने-पीने के इंतजाम इनके स्तर पर हो पाते हैं। सरकारी एजेंसियों का स्टाफ बकायदा प्रशिक्षित होता है। 

लेकिन प्राइवेट होटल-ढाबे संचालकों के साथ ये स्थिति नहीं होती। पर्यटन विभाग ने महसूस किया है कि कई बार यात्री मजबूरी वश प्राइवेट होटल-ढाबों में रुकता है, लेकिन उसे अच्छे अनुभव नहीं होते। इससे राज्य की छवि खराब होती है। इसे देखते हुए इस बार होटल-ढाबे वालों को अतिथि सत्कार सिखाया जा रहा है।

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