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जानिए, ऐसी मशीन के बारे में जो 'खा' जाती है प्लास्टिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:23 PM IST
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plastic recycling machine
- फोटो : amar ujala
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जी हां, राजधानी देहरादून में प्लास्टिक खाने वाली मशीन आ गई है। आइए जानते हैं इस मशीन के बारे में...
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देहरादून में खाली प्लास्टिक बोतलों का सही ढंग से री-साइकिलिंग अब बायो क्रश रिवर्स वेंडिंग मशीन (आरवीएम) से होगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वजल परियोजना की ओर से सचिवालय में पहली आरवीएम मशीन लगाई गई।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मशीन का उद्घाटन किया। मशीन में एकत्रित होने वाले क्रश प्लास्टिक को 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्राइवेट कंपनी खरीदेगी। इसके लिए बायो क्रश कंपनी के साथ जल्द ही एमओयू होगा। ट्रायल में कामयाबी मिलने पर आरवीएम मशीन को प्रदेश भर में स्थापित किया जाएगा।
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स्वच्छता पर बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा
trivendra singh rawat
- फोटो : file photo
मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय परिसर को स्वच्छ बनाने के लिए स्वजल परियोजना और इलाहाबाद बैंक के सहयोग से बायो क्रश रिवर्स वेंडिंग मशीन स्थापित की गई। सचिवालय में कार्मिकों के साथ विभागीय कार्यों के लिए लोगों को आना-जाना रहता है।
इस मशीन के प्रयोग से लोगों के व्यवहार परिवर्तन के साथ ही स्वच्छता पर बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। उपयोग की गई प्लास्टिक बोतलों का सही ढंग से निस्तारण होगा। इस मौके पर विधायक गणेश जोशी, अपर सचिव राघव लंगर, सचिव सचिवालय प्रशासन हरबंस सिंह चुघ, अपर सचिव विनोद रतूड़ी, स्वजल परियोजना के प्रबंधक भीम सिंह आदि मौजूद थे।
यह मशीन दिलाएगी सम्मान
स्वजल परियोजना के निदेशक राघव लंगर ने बताया कि प्लास्टिक बोतल को मशीन के अंदर डालने पर संबंधित व्यक्ति को स्क्रीन पर अपना मोबाइल नंबर डालने के बाद धन्यवाद का मैसेज जाएगा। जिस व्यक्ति या कार्मिक को सबसे ज्यादा मैसेज मिलेंगे, उसे स्वच्छता का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। मशीन में एक डिजिटल स्क्रीन लगी है। जिसे पेन ड्राइव के माध्यम से चलाया जाएगा। इससे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी। मशीन में एक दिन में करीब 500 खाली प्लास्टिक की बोतलें क्रश की जा सकती हैं।
इस मशीन के प्रयोग से लोगों के व्यवहार परिवर्तन के साथ ही स्वच्छता पर बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। उपयोग की गई प्लास्टिक बोतलों का सही ढंग से निस्तारण होगा। इस मौके पर विधायक गणेश जोशी, अपर सचिव राघव लंगर, सचिव सचिवालय प्रशासन हरबंस सिंह चुघ, अपर सचिव विनोद रतूड़ी, स्वजल परियोजना के प्रबंधक भीम सिंह आदि मौजूद थे।
यह मशीन दिलाएगी सम्मान
स्वजल परियोजना के निदेशक राघव लंगर ने बताया कि प्लास्टिक बोतल को मशीन के अंदर डालने पर संबंधित व्यक्ति को स्क्रीन पर अपना मोबाइल नंबर डालने के बाद धन्यवाद का मैसेज जाएगा। जिस व्यक्ति या कार्मिक को सबसे ज्यादा मैसेज मिलेंगे, उसे स्वच्छता का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। मशीन में एक डिजिटल स्क्रीन लगी है। जिसे पेन ड्राइव के माध्यम से चलाया जाएगा। इससे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी। मशीन में एक दिन में करीब 500 खाली प्लास्टिक की बोतलें क्रश की जा सकती हैं।