दांत ही नहीं रक्तचाप में भी रामबाण है यह पहाड़ी पौधा, फायदे ऐसे कि यकीन नहीं होगा
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उत्तराखंड का पर्वतीय इलाका अकूत वन संपदा और औषधियों के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है। प्रकृति ने इस धरती को कई ऐसी औषधियां दी हैं, जिनका प्रयोग स्थानीय लोग सदियों से करते आ रहे हैं।
अमूमन सुना, जाता है कि पहाड़ी नीम के नाम से जाना जाने वाला तिमूर दांतों के रोग में ही कारगर है लेकिन यह औषधीय पौधा रक्तचाप के साथ ही कृमि नाशक और उदर रोग में भी उपयोगी है।
दातून के रूप में भी होता है प्रयोग
कुमाऊं में तिमूर, गढ़वाली में टिमरु और संस्कृत में तेजोवती नाम से जाने जाने वाले इस औषधीय वनस्पति का लेटिन नाम जेनथोजायलम अर्मेटम है। झाड़ीनुमा इस वृक्ष की लंबाई 10 से 12 मीटर होती है। इस वनस्पति का एक-एक हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
सामान्य रूप से स्थानीय लोग इसकी टहनियों का प्रयोग दातून के रूप में करते हैं। इसकी टहनियों से बनाए गए दातून के प्रयोग से दांतों के साथ ही संपूर्ण मुंह को निरोगी बनाया जा सकता है। पायरिया जैसे मसूड़ों के रोग के लिए भी इसे बेहतरीन औषधि के रूप में जाना जाता है। पर्वतीय क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण औषधि का संरक्षण कर रोजगार के विभिन्न अवसर पैदा किए जा सकते हैं। तिमूर की खेती को बढ़ावा देकर पलायन की मार को भी रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार और राजनेताओं को मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
औषधीय गुणों से भरपूर है तिमूर : डॉ. जोशी
विख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के डॉ. नवीन जोशी (एमडी आयुर्वेद) बताते हैं कि तिमूर औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी टहनियों से निर्मित औषधि रक्तचाप को नियंत्रित करती है।
इसके बीजों का प्रयोग माउथ फ्रेसनर, कृमिनाशक दवा के साथ ही उदर रोगों के लिए किया जाता है। बताते हैं कि इसके बीजों में पाया जाने वाला लीनालोल नामक रसायन एंटीसेप्टिक के रूप में कार्य करता है। इसकी पत्तियों के चूर्ण का उपयोग दांतों के लिए उपयोगी टूथ पाउडर बनाने में किया जाता है।