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Dehradun News: भारतीय चिंतन की व्यापक दृष्टि को दर्शाते हैं श्लोक
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संवाद न्यूज एजेंसी
साहिया। सरदार महिपाल राजेंद्र जनजातीय स्नातकोत्तर कॉलेज, सहिया में भारतीय ज्ञान, परंपरा, शिक्षा, विज्ञान व समाज में समकालीन प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी कहा कि ऋग्वेद के श्लोक सद् विप्रा बहुधा वदन्ति और तैत्तिरीयोपनिषद का सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म भारतीय चिंतन की उस व्यापक दृष्टि को दर्शाते हैं, जो ज्ञान को बहुआयामी, तर्कसंगत एवं सार्वकालिक मानती है।
शुक्रवार को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से जुड़े प्रख्यात शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। महाविद्यालय की उप प्राचार्य डॉ. प्रियंका जलाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
डॉ. राजकुमारी भंडारी, डॉ. हरी ओम शंकर, डॉ. सुमेर चंद्र, डॉ. मंजू भंडारी और डॉ. पूजा पालीवाल ने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। गोष्ठी में मध्य प्रदेश से डॉ. रमेश प्रसाद अहिरवाल, असम से डॉ. सानू सिन्हा, उड़ीसा से डॉ. सौरभ कपूर, दिल्ली से डॉ. गजेंद्र प्रताप, राजस्थान से डॉ. दीक्षिता अजवानी, महाविद्यालय के चेयरमैन अनिल सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
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साहिया। सरदार महिपाल राजेंद्र जनजातीय स्नातकोत्तर कॉलेज, सहिया में भारतीय ज्ञान, परंपरा, शिक्षा, विज्ञान व समाज में समकालीन प्रासंगिकता विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी कहा कि ऋग्वेद के श्लोक सद् विप्रा बहुधा वदन्ति और तैत्तिरीयोपनिषद का सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म भारतीय चिंतन की उस व्यापक दृष्टि को दर्शाते हैं, जो ज्ञान को बहुआयामी, तर्कसंगत एवं सार्वकालिक मानती है।
शुक्रवार को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से जुड़े प्रख्यात शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। महाविद्यालय की उप प्राचार्य डॉ. प्रियंका जलाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
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डॉ. राजकुमारी भंडारी, डॉ. हरी ओम शंकर, डॉ. सुमेर चंद्र, डॉ. मंजू भंडारी और डॉ. पूजा पालीवाल ने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। गोष्ठी में मध्य प्रदेश से डॉ. रमेश प्रसाद अहिरवाल, असम से डॉ. सानू सिन्हा, उड़ीसा से डॉ. सौरभ कपूर, दिल्ली से डॉ. गजेंद्र प्रताप, राजस्थान से डॉ. दीक्षिता अजवानी, महाविद्यालय के चेयरमैन अनिल सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
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