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Dehradun News: विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण प्रस्ताव के विरोध में होगा आंदोलन
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- उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने बैठक में लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तरांचल पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण करने की मुहिम का सख्त विरोध किया। एसोसिएशन ने बैठक में निर्णय लिया कि इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल 2025 और वितरण कंपनियों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
एसोसिएशन के महासचिव राहुल चनना ने कहा, 10 अक्तूबर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और राजस्थान के विद्युत मंत्री शामिल थे। जिसमें सहमति बनी कि विद्युत वितरण निगमों को केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता के लिए तीन विकल्प दिए जाएं। पहला विकल्प विद्युत वितरण निगमों को 51 प्रतिशत इक्विटी बेचकर निजीकरण करने का, दूसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को कम से कम 26 प्रतिशत इक्विटी निजी क्षेत्र को बेचने और प्रबंधन निजी क्षेत्र का स्वीकार करने और तीसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराए जाने का है।
छह राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है। आगामी बजट सत्र में केंद्र सरकार यह प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रही है। वित्तीय सहायता के नाम पर राज्यों पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय थोपने का कड़ा विरोध किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तरांचल पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण करने की मुहिम का सख्त विरोध किया। एसोसिएशन ने बैठक में निर्णय लिया कि इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल 2025 और वितरण कंपनियों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
एसोसिएशन के महासचिव राहुल चनना ने कहा, 10 अक्तूबर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और राजस्थान के विद्युत मंत्री शामिल थे। जिसमें सहमति बनी कि विद्युत वितरण निगमों को केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता के लिए तीन विकल्प दिए जाएं। पहला विकल्प विद्युत वितरण निगमों को 51 प्रतिशत इक्विटी बेचकर निजीकरण करने का, दूसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को कम से कम 26 प्रतिशत इक्विटी निजी क्षेत्र को बेचने और प्रबंधन निजी क्षेत्र का स्वीकार करने और तीसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराए जाने का है।
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छह राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है। आगामी बजट सत्र में केंद्र सरकार यह प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रही है। वित्तीय सहायता के नाम पर राज्यों पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय थोपने का कड़ा विरोध किया जाएगा।
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