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मौसम हुआ मेहरबान तो ठंडी पड़ी जंगलों की आग

Thu, 05 May 2016 09:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 05 May 2016 09:34 PM IST
सार

  • राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक बृहस्पतिवार को आग लगने की कोई घटना नहीं
  • आला अफसरों, सुरक्षाकर्मियों ने ली राहत की सांस

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there is no forest fire in uttarakhand after weather change.
बारिश - फोटो : AmarUjala

विस्तार

उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से मुसीबत का सबब बनी जंगलों में लगी आग आखिरकार थम गई है। पिछले दो दिनों में मौसम ने जो करवट ली उसने आग की घटनाओं पर अंकुश लगा दिया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक बृहस्पतिवार को किसी भी जिले से जंगलों में नए सिरे से आग लगने की घटनाएं नहीं हुई है।

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मौसम के बदले मिजाज और कई जगहों पर हल्की बारिश के साथ ही जंगलों में लगी आग पर अंकुश लगने के साथ शासन और वन विभाग के आला अफसरों, सुरक्षाकर्मियों ने राहत की सांस ली है। आग पर अंकुश पाने को जुटी वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग के अफसरों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह मेहरबान रहा तो अब जंगलों में पहले की तरह आग भड़कने की संभावना बहुत कम ही है।
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अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने बताया कि बृहस्पतिवार को राज्य के किसी भी क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं नहीं हुई है, जो राहत की बात है। फिर भी स्थिति पर पैनी निगाह रखी जा रही है।

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3879 हेक्टेयर वन क्षेत्र बर्बाद, 1766 जगह लगी आग

there is no forest fire in uttarakhand after weather change.
जंगल की आग - फोटो : AmarUjala

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले एक सप्ताह से राज्य के विभिन्न इलाकों में जंगलों में आग लगने की 1766 छोटी बड़ी घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में 3879 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। आग की घटनाओं से जहां करोड़ों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है, वहीं जंगली जीवों को भी जान गवानी पड़ी है। वन विभाग के आला अफसरों के निर्देश पर स्थानीय अधिकारी वन संपदाओं को हुए नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं।

11,733 सुरक्षाकर्मियों ने झोंकी ताकत
जंगलों में धधक रही आग पर काबू पाने के लिए वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरफ, वन विभाग, पुलिस समेत 11,733 अधिकारियों, कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया गया। इस दौरान एक पुलिसकर्मी और सात अन्य लोगों को जान भी गंवानी पड़ी। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के प्रभारी डा. पीयूष रौतेला के मुताबिक पूरे अभियान के दौरान 2,949 ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सतर्क
मौसम के बदले मिजाज के चलते आग पर प्रभावी अंकुश लगने के बावजूद वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ को सतर्क रखा गया है। बृहस्पतिवार को वायुसेना के हेलीकाप्टरों ने लगातार दूसरे दिन भी उड़ान नहीं भरी। आपदा प्रबंधन विभाग से जुडे़ एक अफसर के मुताबिक अब जबकि  आग की घटनाओं पर अंकुश लग गया है तो वायुसेना और एनडीआरएफ की सेवाएं रोकी जा सकती है। क्योंकि इनके इस्तेमाल से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

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