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Dehradun News: उप जिला अस्पताल विकासनगर में एक माह से नहीं है एंटी रेबीज का टीका
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उप जिला अस्पताल विकासनगर में करीब एक माह से एंटी रेबीज का टीका नहीं है। कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने के बाद अस्पताल में आने वाले लोगों को बाहर से टीका खरीदना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें 1900 से 1950 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
उप जिला अस्पताल में अगस्त माह के मध्य से एंटी रेबीज टीके की आपूर्ति बंद हो गई थी। अब करीब एक माह तक बीत चुका है, लेकिन अस्पताल में टीके की आपूर्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटे 20 से 25 केस रोज आते हैं। मरीजों को टिटनेस का टीका लगा दिया जाता है। लेकिन, वैक्सीन न होने पर लोगों को बाहर से लाने के लिए कहा जा रहा है। अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र में भी एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। लोगों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से टीका खरीदना पड़ रहा है। पूरे उपचार के लिए टीके की पांच खुराक लेनी पड़ती है। एक खुराक की कीमत विभिन्न ब्रांड के अनुसार 380 से 390 रुपये के मध्य है। पूरे कोर्स का खर्च करीब 1900 से 1950 रुपये के मध्य होता है। उप जिला अस्पताल में पछवादून और जौनसार बावर से मरीज और घायल उपचार के लिए आते है। जौनसार बावर जनजाति क्षेत्र है। यहां अधिकांश लोग पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं। वहीं, पछवादून का भी अधिकांश भाग ग्रामीण क्षेत्र है। ऐसे में कमजोर आय वर्ग के लोगों को कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने पर उपचार काफी महंगा पड़ रहा है।
उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय सिंह ने बताया कि मुख्यालय से एंटी रेबीज टीके की आपूर्ति नहीं हो रही है। अस्पताल से लगातार डिमांड भेजी जा रही है। आपूर्ति कब शुरू होगी, इसकी जानकारी नहीं मिल रही है। दवाओं और टीके की स्थानीय खरीद भी नहीं की जा सकती है।
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उप जिला अस्पताल में अगस्त माह के मध्य से एंटी रेबीज टीके की आपूर्ति बंद हो गई थी। अब करीब एक माह तक बीत चुका है, लेकिन अस्पताल में टीके की आपूर्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटे 20 से 25 केस रोज आते हैं। मरीजों को टिटनेस का टीका लगा दिया जाता है। लेकिन, वैक्सीन न होने पर लोगों को बाहर से लाने के लिए कहा जा रहा है। अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र में भी एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। लोगों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से टीका खरीदना पड़ रहा है। पूरे उपचार के लिए टीके की पांच खुराक लेनी पड़ती है। एक खुराक की कीमत विभिन्न ब्रांड के अनुसार 380 से 390 रुपये के मध्य है। पूरे कोर्स का खर्च करीब 1900 से 1950 रुपये के मध्य होता है। उप जिला अस्पताल में पछवादून और जौनसार बावर से मरीज और घायल उपचार के लिए आते है। जौनसार बावर जनजाति क्षेत्र है। यहां अधिकांश लोग पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं। वहीं, पछवादून का भी अधिकांश भाग ग्रामीण क्षेत्र है। ऐसे में कमजोर आय वर्ग के लोगों को कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने पर उपचार काफी महंगा पड़ रहा है।
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उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय सिंह ने बताया कि मुख्यालय से एंटी रेबीज टीके की आपूर्ति नहीं हो रही है। अस्पताल से लगातार डिमांड भेजी जा रही है। आपूर्ति कब शुरू होगी, इसकी जानकारी नहीं मिल रही है। दवाओं और टीके की स्थानीय खरीद भी नहीं की जा सकती है।
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