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Dehradun News: अंगीठी ही नहीं हीटर और ब्लोअर का भी संभलकर करें प्रयोग

Tue, 16 Jan 2024 02:07 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jan 2024 02:07 AM IST
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There is a common belief that there is a risk of
I- खिड़की दरवाजे पूरी तरह से न करें बंद, सोते समय हीटर और ब्लोअर को कर दें बंद
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I- बंद कमरे में रूम हीटर और ब्लोअर से आक्सीजन के स्तर में आती है कमीI

आम धारणा है कि बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोने से दम घुटने का खतरा रहता है। लकड़ी के जलने से कार्बन मोनोआक्साइड गैस पैदा होती है। यह प्राणघातक होती है। इसलिए लोग ठंड से बचने के लिए रूम हीटर और ब्लोअर का प्रयोग करते हैं। बंद कमरे में इसके प्रयोग से भी आक्सीजन के स्तर में कमी आती है। इसके चलते हाइपोक्सिया की संभावना बढ़ जाती है।



सर्दियों में हाइपोक्सिया से मौते के मामले बढ़ जाते हैं। अधिकांश मामले अंगीठी के धुएं से पैदा होने वाली कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस के होते हैं। एक आम धारणा यह है कि हीटर और ब्लोअर का प्रयोग पूरी तरह से सुरक्षित होता है। कई लोगों के घरों में दिनभर हीटर और ब्लोअर चलते रहते हैं।
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उप जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय सिंह बताते हैं कि अंगीठी की अपेक्षाकृत हीटर और ब्लोअर का प्रयोग अधिक सुरक्षित होता है, लेकिन इनके लगातार प्रयोग से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूरी तरह से बंद कमरे में हीटर और ब्लोअर के प्रयोग से आक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। वहीं, कार्बन डाइआक्साइड का स्तर धीरे धीरे बढ़ता चला जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को घुटन महसूस होने लगती है। इससे हाइपोक्सिया की आशंका बढ़ती है।
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डॉ. विजय सिंह ने बताया कि हीटर और ब्लोअर के प्रयोग से कमरे की नमी के स्तर में भारी कमी आती है। इससे आंखों और चमड़ी में एलर्जी की समस्या होने लगती है। वहीं, एलर्जी के साथ द्वितीयक संक्रमण होने से स्थिति गंभीर भी हो सकती है। हीटर और ब्लोअर के बिल्कुल करीब बैठने से चमड़ी के जलने या सूखी त्वचा की समस्या भी सकती है। असावधानी बरतने से आग लगने की आशंका भी रहती है। उन्होंने कहा कि सीमित समय के लिए कुछ सावधानियों के साथ हीटर और ब्लोअर का प्रयोग किया जा सकता है।





Iक्या है हाइपोक्सियाI

हाइपोक्सिया में शरीर में आक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। शरीर के अंगो और ऊतकों को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल पाती है। हाइपोक्सियां के लक्षण प्रकट होने के कुछ ही अंतराल में मस्तिष्क और लिवर समेत विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है। अंंत में दम घुटने और अंग नाकाम होने से व्यक्ति की मौत हो जाती है।






Iहाइपोक्सिया के लक्षणI

- शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने से भ्रम, बेचैनी, सांस लेने में दिक्कत, हृदय गति बढ़ना, नीली चमड़ी जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।





Iहीटर और ब्लोअर के प्रयोग से कम होती है नमीI

हीटर और ब्लोअर कमरे की हवा को शुष्क कर देते हैं। इससे चमड़ी, आंख, कान, गले में समस्या हो सकती है। हीटर और ब्लोअर का प्रयोग करते समय घरों में ह्यूमिडिफायर का प्रयोग करें। इससे कमरे में नमी बनी रहेगी।


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