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Dehradun News: फायर ब्रिगेड के सामने चुनौती नई, ट्रेनिंग पुरानी
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I- केमिकल फायर और इंडस्ट्रियल हादसों के लिए प्रशिक्षण की दरकार
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I- एक ट्रेनिंग सेंटर का प्रस्ताव भी फायर ब्रिगेड की ओर से भेजा गयाI
फायर ब्रिगेड के सामने नई-नई चुनौतियां हैं।, लेकिन, ट्रेनिंग अभी पुरानी ही चल रही है। नई चुनौतियों से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड को नई ट्रेनिंग की भी आवश्यकता है। इसके लिए फायर ब्रिगेड की ओर से केमिकल फायर और इंडस्ट्रियल हादसों से निपटने के लिए एक विशेष ट्रेनिंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके जल्द ही वर्ल्ड बैंक से स्वीकृत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दरअसल, फायर ब्रिगेड में फायरमैन को आग बुझाने और रेस्क्यू आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग सामान्य अग्निकांड और हादसों में काम आती है। जबकि, समय के साथ प्रदेश में बहुत से औद्योगिक क्षेत्रों का भी विकास हुआ है। यहां तमाम छोटी-बड़ी फैक्टरी में कई तरह के केमिकल इस्तेमाल होते हैं। केमिकल में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड के पास फोम टेंडर आदि उपलब्ध हैं। दमकल कर्मियों को रिफ्रेशिंग कोर्स भी कराया जाता है। ताकि, इस तरह की आग पर काबू पाया जा सके, लेकिन उनके लिए कोई ऐसा ट्रेनिंग सेंटर प्रदेश में नहीं है, जिस पर समुचित प्रशिक्षण कर्मियों को दिया जा सके।
इसके लिए समय-समय पर मांग होती रही है। अब नए फायर सेफ्टी नियमों में इसकी जरूरत और ज्यादा हो गई है। विशेष ट्रेनिंग सेंटर का एक प्रस्ताव पिछले दिनों फायर सर्विस की ओर से भेजा गया था। बताया जा रहा है कि इस पर वर्ल्ड बैंक से स्वीकृति मिल सकती है। ऐसा होने से फायरमैन किसी भी तरह की आग पर काबू पाने के लिए तैयार हो जाएंगे।
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बता दें कि फैक्टरी में होने वाले अग्निकांड में सामान्य भवनों में लगी आग बुझाने में अधिक कुशलता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा केमिकल फायर ब्रेक यानी केमिकल में आग लगने के लिए विशेष प्रशिक्षण और उपकरणों की आवश्यकता होती है।
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I- एक ट्रेनिंग सेंटर का प्रस्ताव भी फायर ब्रिगेड की ओर से भेजा गयाI
फायर ब्रिगेड के सामने नई-नई चुनौतियां हैं।, लेकिन, ट्रेनिंग अभी पुरानी ही चल रही है। नई चुनौतियों से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड को नई ट्रेनिंग की भी आवश्यकता है। इसके लिए फायर ब्रिगेड की ओर से केमिकल फायर और इंडस्ट्रियल हादसों से निपटने के लिए एक विशेष ट्रेनिंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके जल्द ही वर्ल्ड बैंक से स्वीकृत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दरअसल, फायर ब्रिगेड में फायरमैन को आग बुझाने और रेस्क्यू आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग सामान्य अग्निकांड और हादसों में काम आती है। जबकि, समय के साथ प्रदेश में बहुत से औद्योगिक क्षेत्रों का भी विकास हुआ है। यहां तमाम छोटी-बड़ी फैक्टरी में कई तरह के केमिकल इस्तेमाल होते हैं। केमिकल में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड के पास फोम टेंडर आदि उपलब्ध हैं। दमकल कर्मियों को रिफ्रेशिंग कोर्स भी कराया जाता है। ताकि, इस तरह की आग पर काबू पाया जा सके, लेकिन उनके लिए कोई ऐसा ट्रेनिंग सेंटर प्रदेश में नहीं है, जिस पर समुचित प्रशिक्षण कर्मियों को दिया जा सके।
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इसके लिए समय-समय पर मांग होती रही है। अब नए फायर सेफ्टी नियमों में इसकी जरूरत और ज्यादा हो गई है। विशेष ट्रेनिंग सेंटर का एक प्रस्ताव पिछले दिनों फायर सर्विस की ओर से भेजा गया था। बताया जा रहा है कि इस पर वर्ल्ड बैंक से स्वीकृति मिल सकती है। ऐसा होने से फायरमैन किसी भी तरह की आग पर काबू पाने के लिए तैयार हो जाएंगे।
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बता दें कि फैक्टरी में होने वाले अग्निकांड में सामान्य भवनों में लगी आग बुझाने में अधिक कुशलता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा केमिकल फायर ब्रेक यानी केमिकल में आग लगने के लिए विशेष प्रशिक्षण और उपकरणों की आवश्यकता होती है।