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Dehradun News: पारिस्थितिकी के साथ छेड़छाड़ करना हो सकता है घातक
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Iदून विवि में वर्ल्ड कांग्रेस के छठे सम्मलेन के प्री-कॉन्फ्रेंस पैनल में किया गया डिस्कशन
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Iदेहरादून डिक्लेरेशन केंद्रित होगी डिजास्टर मैनेजमेंट की छ्ठवीं वर्ल्ड कांग्रेसI
दुनिया मानव जनित और प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ती हुई चुनौतियों से जूझ रही है। व्यक्तिगत और अल्प लाभांश के लिए पारिस्थितिकी के साथ छेड़छाड़ करना घातक हो सकता है। मानव निर्मित आपदाओं को जन्म मिल सकता है।
दून विश्वविद्यालय में बुधवार को वर्ल्ड कांग्रेस के छठे सम्मलेन के प्री-कॉन्फ्रेंस पैनल डिस्कशन में विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने यह बात कही। इस कॉन्फ्रेंस की थीम डिजास्टर मैनेजमेंट और मुख्य केंद्र उत्तराखंड था। कार्यक्रम में 200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया।
प्री-कॉन्फ्रेंस में प्रमुख वक्ता डायरेक्टर जनरल यू कास्ट से डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि हमें ऐसे सुरक्षित निवेश की आवश्यकता है। जिससे टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके। प्रो. एसपी सिंह ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन चिंताजनक दर से बढ़ रहा है, जिसके लिए रणनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
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प्रो. सिंह ने सुझाव दिया कि इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की तैयारियों को जापान की प्लेबुक से एक पृष्ठ लेना चाहिए, जो अपनी मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणालियों के लिए प्रसिद्ध है। स्कूल ऑफ सोशल साइंस के डीन प्रो. आरपी ममगाईं ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के लिए लचीली रणनीति विकसित करने की आवश्यकता है।
संचालन करते हुए स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन प्रो. एचसी पुरोहित ने कहा कि आपदा संभावित और प्रभावित राज्यों के लिए ऐसी नीतियां होनी चाहिए, जिसमें जन सामान्य की भागीदारी सुनिश्चित हो। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन के प्रो. हर्ष पी. डोभाल, प्रो. पल्लवी उप्रेती, डॉ. मधु बिष्ट, डॉ सुशांत कुमार, डॉ. राशि मिश्रा, डॉ. सविता तिवारी, डॉ. अंशुमान मिश्रा, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. सोनू ढिल्लो मौजूद रहे।
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Iदेहरादून डिक्लेरेशन केंद्रित होगी डिजास्टर मैनेजमेंट की छ्ठवीं वर्ल्ड कांग्रेसI
दुनिया मानव जनित और प्राकृतिक आपदाओं से बढ़ती हुई चुनौतियों से जूझ रही है। व्यक्तिगत और अल्प लाभांश के लिए पारिस्थितिकी के साथ छेड़छाड़ करना घातक हो सकता है। मानव निर्मित आपदाओं को जन्म मिल सकता है।
दून विश्वविद्यालय में बुधवार को वर्ल्ड कांग्रेस के छठे सम्मलेन के प्री-कॉन्फ्रेंस पैनल डिस्कशन में विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने यह बात कही। इस कॉन्फ्रेंस की थीम डिजास्टर मैनेजमेंट और मुख्य केंद्र उत्तराखंड था। कार्यक्रम में 200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया।
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प्री-कॉन्फ्रेंस में प्रमुख वक्ता डायरेक्टर जनरल यू कास्ट से डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि हमें ऐसे सुरक्षित निवेश की आवश्यकता है। जिससे टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके। प्रो. एसपी सिंह ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन चिंताजनक दर से बढ़ रहा है, जिसके लिए रणनीतिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
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प्रो. सिंह ने सुझाव दिया कि इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की तैयारियों को जापान की प्लेबुक से एक पृष्ठ लेना चाहिए, जो अपनी मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणालियों के लिए प्रसिद्ध है। स्कूल ऑफ सोशल साइंस के डीन प्रो. आरपी ममगाईं ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के लिए लचीली रणनीति विकसित करने की आवश्यकता है।
संचालन करते हुए स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के डीन प्रो. एचसी पुरोहित ने कहा कि आपदा संभावित और प्रभावित राज्यों के लिए ऐसी नीतियां होनी चाहिए, जिसमें जन सामान्य की भागीदारी सुनिश्चित हो। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन के प्रो. हर्ष पी. डोभाल, प्रो. पल्लवी उप्रेती, डॉ. मधु बिष्ट, डॉ सुशांत कुमार, डॉ. राशि मिश्रा, डॉ. सविता तिवारी, डॉ. अंशुमान मिश्रा, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. सोनू ढिल्लो मौजूद रहे।