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Dehradun News: तौली के गुमान सिंह को फूलों की खेती ने दिलाई पहचान

Mon, 27 Nov 2023 12:15 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 27 Nov 2023 12:15 AM IST
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The villages of Uttarakhand, full of natural beauty,
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I-गुमान सिंह की पहल गांव को दी दिशा,फूलों की सुगंध से महक उठा गांव
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I-गांव के अब अधिकतर लोगों ने दूसरे कामों को छोड़कर अपनाया फूलों की खेती कोI

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण उत्तराखंड के गांव खेती-किसानी में एक अलग पहचान बनाने में जुटे हैं। यहां के युवाओं से लेकर उम्रदराज लोग खेती में रुझान ले रहे हैं। वहीं गांव तौली के गुमान सिंह तोमर प्राइवेट कंपनी में बड़े ओहदे की नौकरी को छोड़ फूलों की खेती कर ग्रामीणों के बीच नजीर पेश कर रहे हैं। गुमान सिंह की सलाना आय भी एक अच्छे खासे सरकारी मुलाजिम से कम नहीं है।

परंपरागत खेती को अब गांव के लोग अलविदा कर रहे हैं। वहीं आधुनिक खेती में भी कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों को उगाने में ही किसान बेहतरी समझने लगे हैं। ऐसे ही कहानी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर विकासनगर ब्लॉक के गांव तौली के किसान गुमान सिंह की कहानी बयान करती है।
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हेमवंती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से बीए तक की पढ़ाई करने वाले गुमान सिंह जेपी पावर जैसी बड़ी कंपनी में सुपरवाइजर से लेकर एचआर जैसे बड़े ओहदे तक पहुंचे। नौकरी छोड़ने के बाद कुछ समय तक वह बतौर सरकारी कॉन्ट्रेक्टर के रूप में कार्यरत रहे।
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Iखेती में रुझान बढ़ा तो नौकरी को अलविदा कहाI

जिले में बढ़ती फूलों की खेती और उससे होने वाली आमदनी से गुमान सिंह ऐसे प्रभावित हुए कि उन्होंने गांव में ही फूलों की खेती करने की सोची। गुमान सिंह तोमर की मेहनत को देख बेटे सोहन सिंह तोमर ने पिता गुमान सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। वहीं विभागीय योजना से पहले एक पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती की और सफलता हासिल की। फिलहाल गुमान सिंह के पास तीन पॉली हाउस में करीब चार हजार वर्ग मीटर में जरबेरा की विभिन्न रंग व प्रजाति के फूलों का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा गांव के लोग भी गुमान सिंह से ऐसे प्रभावित हुए कि आज गांव में आधा दर्जन से ज्यादा लोग जरबेरा, गेंदा, गुलाब की खेती कर रहे हैं।



Iगांव के प्रधान बन लोगों की किया प्रेरितI



गुमान सिंह तोमर जब गांव लौटे तो अधिकांश लोग परंपरागत खेती व अन्य मजदूरी आदि कार्य कर गुजर बसर करते थे। 2014 में प्रधान बनने पर गुमान सिंह ने ग्रामीणों को फूलों की खेती करने केे लिए प्रेरित किया। इसके अलावा विभागीय येाजनाओं का लाभ दिलाने में भी लोगों के सहायक बने।

पांच से छह लाख तक हर वर्ष हो रही आमदनी



गुमान सिंह तोमर बताते है कि फूलों की खेती में आमदनी इस बात पर निर्भर करती है कि बाजार का रुख का है। हालांकि अभी तक बाजार में फूलों का बाजार में बेहतर भाव। हालांकि ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा होने से अब गांव की फसल को दूर-दराज क्षेत्रों तक आसानी से भेजा रहा है। वहीं ग्रामीण भी तेजी से फूलों की खेती की ओर अग्रसर हुए है।


Iफूलों की खेती में बढ़ रही चुनौतियांI



गुमान सिंह के बेटे सोहन तोमर ने बताया कि पहले जरबेरा के फूलों के एक बंज के लिए अधिक दाम मिलते थे। लेकिन बाजार में कपड़े व प्लास्टिक के डेकोरेशन फूलों के आ जाने से फूलों की खेती प्रभावित हुई है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार कर कपड़े व प्लास्टिक आदि डेकोरेशन के फूल तैयार करने वाली कंपनियों पर बैन लगाना चाहिए।
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