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Dehradun News: दून अस्पताल की इमरजेंसी में शौचालय का बुरा हाल
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Iशौचालय में न पानी की सप्लाई और निकासी भी सही नहींI
दून अस्पताल की इमरजेंसी में शौचालय का बुरा हाल है। शौचालय में न पानी की सप्लाई सही है और न निकासी। इससे मरीजों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
बृहस्पतिवार को इमरजेंसी के पुरुष शौचालय में पानी के साथ ही गंदगी फैली हुई थी। दुर्गंध से बुरा हाल था। इससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों के ज्यादा बीमार हाेने का भी खतरा बना हुआ है। इसके अलावा शौचालय में पानी की व्यवस्था भी सही नहीं है। टॉयलेट की सीट भी बैठने लायक नहीं है।
नेशविला रोड निवीसी गीता वर्मा ने बताया कि उनकी बहू को बच्चा हुआ है। अस्पताल में इलाज की व्यवस्था सही है, लेकिन शौचालय बहुत गंदे हैं। इसलिए परेशानी हो रही है। वहीं, सहस्त्रधारा निवासी कविता ने बताया कि उनके पेट और सिर में दर्द और चक्कर आने की दिक्कत के चलते दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन यहां पर कोई स्टाफ मौजूद नहीं रहता है।
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वहीं, जाखन निवासी सरोजनी देवी ने बताया कि उनको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। अस्पताल आए तो इलाज शुरू होने में भी लंबा इंतजार करना पड़ा। पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने में समय लग गया।
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दून अस्पताल की इमरजेंसी में शौचालय का बुरा हाल है। शौचालय में न पानी की सप्लाई सही है और न निकासी। इससे मरीजों और तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
बृहस्पतिवार को इमरजेंसी के पुरुष शौचालय में पानी के साथ ही गंदगी फैली हुई थी। दुर्गंध से बुरा हाल था। इससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों के ज्यादा बीमार हाेने का भी खतरा बना हुआ है। इसके अलावा शौचालय में पानी की व्यवस्था भी सही नहीं है। टॉयलेट की सीट भी बैठने लायक नहीं है।
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नेशविला रोड निवीसी गीता वर्मा ने बताया कि उनकी बहू को बच्चा हुआ है। अस्पताल में इलाज की व्यवस्था सही है, लेकिन शौचालय बहुत गंदे हैं। इसलिए परेशानी हो रही है। वहीं, सहस्त्रधारा निवासी कविता ने बताया कि उनके पेट और सिर में दर्द और चक्कर आने की दिक्कत के चलते दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन यहां पर कोई स्टाफ मौजूद नहीं रहता है।
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वहीं, जाखन निवासी सरोजनी देवी ने बताया कि उनको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। अस्पताल आए तो इलाज शुरू होने में भी लंबा इंतजार करना पड़ा। पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने में समय लग गया।