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Dehradun News: चकराता की राजमा मशहूर, लेकिन जौनसार खेती से हो रहा दूर

Sun, 05 Nov 2023 12:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 05 Nov 2023 12:21 AM IST
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The taste of red kidney beans produced through organic
Iसिंचाई की कमी, बाजार और वर्गीकृत खेती बन रही अड़चन I
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Iमैदान में बढ़ रहा राजमा का रकबाI

देश विदेश में चकराता की राजमा की अपनी पहचान है। जौनसार क्षेत्र में जैविक खेती से पैदा होने वाली सुर्ख राजमा का स्वाद जुबां से उतारता हीं नहीं है। लेकिन वर्गीकृत खेती, सिंचाई की कमी, मंडी की लंबी दूरी और जंगली जानवरों के बढ़ते दखल के चलते किसान राजमा की खेती से मुंह मोड रहे हैं। ऐसे में राजमा की जगह नकदी फसलों की ओर स्थानीय किसानों का रुझान बढ़ा है। यही कारण है कि जौनसार बावर क्षेत्र में किसान राजमा की खेती से दूर होते जा रहे हैं।
वर्ष 2011 में पूरे देहरादून जिले में राजमा का रकबा 1006 हेक्टेयर था। वहीं उत्पादन 932 मीट्रिक हुआ था। वर्ष 2021-2022 में राजमा का रकबा बढ़कर 1044 हेक्टेयर हो गया। उत्पादन 1016 मीट्रिक टन रहा। लेकिन यह रकबा जौनसार के पर्वतीय क्षेत्रों में नहीं बल्कि कालसी, विकासनगर और सहसपुर के मैदानी क्षेत्रों में बढ़ा है।
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सीमांत मैदानी क्षेत्रों में करीब 700 हेक्टेयर में राजमा की खेती हो रही है। मुख्य तौर सिंचाई और वर्गीकृत खेती के चलते किसान राजमा से दूर हो रहे हैै। किसानों का मानना है कि अगर सिंचाई के लिए नहर निर्माण और चकबंदी जैसे प्रयास हो तो चकराता में एक बार फिर राजमा की बाहर आ सकती है।
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Iगुणों का भंडार है चकराता की राजमाI

चकराता की राजमा पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर दाल है। यह सामान्यत: ठंडे और ऊंचाई वाले इलाकों में पैदा होती है। जून माह के दूसरे सप्ताह में फसल की बुवाई की जाती है। वहीं अक्तूबर माह में फसल तैयार हो जाती है। राजमा की तासीर गर्म होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए इसका खूब सेवन किया जाता है।


I200 से 250 रुपये किलो बिकती है राजमाI

जैविक खेती से उत्पन्न होने वाली चकराता की राजमा स्थानीय बाजारों में 200 से 250 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। उत्तराखंड ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में चकराता की राजमा की नियमित डिमांड रहती है। चकराता में सैर सपाटे के लिए आने वाले पर्यटक भी यहां से राजमा खरीद कर ले जाते हैं।

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Iइन खतों में होती है अधिक खेतीI

जौनसार बावर क्षेत्र के बनगांव, ऊपरौली, अठगांव, द्वार, बिशलाड़, बौनंदूर, तपलाड़, भरम, मशक आदि खतों के गांवों में राजमा का काफी खेती होती है।


Iजौनसार बावर क्षेत्र में अधिकांश खेती वर्षा पर आधारित है। दलहनी फसलों को सितंबर माह में सिंचाई की जरूरत होती है। सिंचाई की सुविधा न होने से उत्पादन कम होता है। किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि सिंचाई नहर या बरसाती पानी संचय से सिंचाई की व्यवस्था की जाए। जब कृषि अनुकूल संसाधन मिलेंगे तो राजमा की खेती भी बढ़ेगी। - खुशीराम, किसान मेहरावना I

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Iजनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के खेत बिखरे हुए है। इसके चलते किसानों को खेती करने और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि चकबंदी नियम लागू कर किसानों को खेती के अनुकूल वातावरण दें। जब खेती कठिन होगी तो किसान नकदी फसल की ओर परिवर्तित होगा। चकराता की राजमा को उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकारी मदद की जरूरत है। - राजेंद्र सिंह, किसान, बिरमऊ I
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