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Dehradun News: दूसरे दिन सुधरी व्यवस्था, अब मरीजों को नहीं करना पड़ रहा लंबा इंतजार
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उप जिला अस्पताल विकासनगर में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आने वाले मरीजों को अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। दो मेडिकल अफसर मरीजों को देख रहे हैं। बुधवार को दोपहर 12 बजे तक करीब 60 मरीज देखे गए। इससे उपचार के लिए आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिली। अमर उजाला ने 16 अक्तूबर के अंक में विशेषज्ञ 25 दिन से अवकाश पर मेडिकल अफसर देख रहीं मरीज शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
उप जिला अस्पताल में सबसे अधिक ओपीडी सामान्य चिकित्सा और स्त्री एवं प्रसूति रोग की है। अधिकतर मरीज जौनसार बावर और सीमांत हिमाचल प्रदेश के होते हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ 26 दिनों से अवकाश पर चल रहीं है। तभी से एक मेडिकल अफसर मरीजों को देख रही थी। मंगलवार को उप जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था की पड़ताल की गई थी। दोपहर 12 बजे तक केवल 23 मरीज देख गए थे। मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। पड़ताल की खबर प्रकाशित होने के बाद सीएमएस ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए ओपीडी में दो मेडिकल अफसरों को बैठने के आदेश दिए। बुधवार को ओपीडी व्यवस्था पटरी पर आ गई। दोपहर 12 बजे तक 60 मरीजों को उपचार मिल गया था।
उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय सिंह ने बताया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में दो मेडिकल अफसर को बैठाने की व्यवस्था कर दी गई है। अब ओपीडी की समयावधि के बीच ही सभी मरीजों को उपचार मिल रहा है।
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उप जिला अस्पताल में सबसे अधिक ओपीडी सामान्य चिकित्सा और स्त्री एवं प्रसूति रोग की है। अधिकतर मरीज जौनसार बावर और सीमांत हिमाचल प्रदेश के होते हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ 26 दिनों से अवकाश पर चल रहीं है। तभी से एक मेडिकल अफसर मरीजों को देख रही थी। मंगलवार को उप जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था की पड़ताल की गई थी। दोपहर 12 बजे तक केवल 23 मरीज देख गए थे। मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। पड़ताल की खबर प्रकाशित होने के बाद सीएमएस ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए ओपीडी में दो मेडिकल अफसरों को बैठने के आदेश दिए। बुधवार को ओपीडी व्यवस्था पटरी पर आ गई। दोपहर 12 बजे तक 60 मरीजों को उपचार मिल गया था।
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उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय सिंह ने बताया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में दो मेडिकल अफसर को बैठाने की व्यवस्था कर दी गई है। अब ओपीडी की समयावधि के बीच ही सभी मरीजों को उपचार मिल रहा है।
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