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Dehradun News: जर्जर सड़क पर हांफने लगते हैं वाहन, सवारियों को लगाना पड़ता है धक्का
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Iसिलीखड्ड-कुनैन मोटर मार्ग से जुड़ी है 2500 की आबादीI
विकासखंड चकराता के कैलो खत के करीब आधा दर्जन गांवों को जोड़ने वाला सिलीखड्ड-कुनैन मोटर मार्ग बेहद खराब स्थिति में है। हालात यह है कि कई बार चढ़ाई पर वाहन हांफने लगते है। तब सवारियों को धक्का लगाना पड़ता है। सात साल बाद भी सड़क की हालत नहीं सुधरी है। लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
सड़क से सैंज, कुनैन, खरोड़ा, कुताड़, अमराड़, झबराड़ समेत आधा दर्जन गांव की करीब 2500 की आबादी जुड़ी है। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 11 किलोमीटर लंबे मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था। इसके बाद से विभाग ने इसकी सुध नहीं ली। हल्की सी बारिश होते ही मलबा सड़क पर आ जाता है। जिस कारण आवाजाही ठप हो जाती है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। जिस कारण पेंटिंग उखड़ गई। जगह-जगह सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। नालियां और स्क्रबर मलबे से चोक हैं। बरसात में आए मलबे के जगह जगह ढेर लगे हैं।
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Iसड़क के रख रखाव की अवधि दो वर्ष पूर्व पूर्ण हो चुकी है। सड़क को लोनिवि खंड चकराता को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। - रोहित श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता लोनिवि (पीएमजीएसवाई) खंड कालसीI
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Iमार्ग पर सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा है। हर रोज ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। सड़क की हालत नहीं सुधारी जा रही है। - महिपाल सिंह राणा, ग्रामीण
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Iकई जगहों पर चढ़ाई अधिक है। इन जगहों पर मार्ग संकरा भी है। अधिक चढ़ाई होेने पर कई बार वाहन को धक्का लगाना पड़ता है। दुर्घटना की आशंका रहती है। - धर्मदत्त डिमरी, ग्राम प्रधान खरोड़ा
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Iअक्सर बारिश में मलबा सड़क पर आ जाता है। किसी के बीमार होने पर उसे डंडी कंडी के सहारे मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। नकदी फसलें भी मंडी तक पहुंचानी मुश्किल हो जाती हैं। - अजीत राणा, ग्राम प्रधान कुनैनI
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विकासखंड चकराता के कैलो खत के करीब आधा दर्जन गांवों को जोड़ने वाला सिलीखड्ड-कुनैन मोटर मार्ग बेहद खराब स्थिति में है। हालात यह है कि कई बार चढ़ाई पर वाहन हांफने लगते है। तब सवारियों को धक्का लगाना पड़ता है। सात साल बाद भी सड़क की हालत नहीं सुधरी है। लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
सड़क से सैंज, कुनैन, खरोड़ा, कुताड़, अमराड़, झबराड़ समेत आधा दर्जन गांव की करीब 2500 की आबादी जुड़ी है। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 11 किलोमीटर लंबे मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था। इसके बाद से विभाग ने इसकी सुध नहीं ली। हल्की सी बारिश होते ही मलबा सड़क पर आ जाता है। जिस कारण आवाजाही ठप हो जाती है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। जिस कारण पेंटिंग उखड़ गई। जगह-जगह सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। नालियां और स्क्रबर मलबे से चोक हैं। बरसात में आए मलबे के जगह जगह ढेर लगे हैं।
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Iसड़क के रख रखाव की अवधि दो वर्ष पूर्व पूर्ण हो चुकी है। सड़क को लोनिवि खंड चकराता को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। - रोहित श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता लोनिवि (पीएमजीएसवाई) खंड कालसीI
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Iमार्ग पर सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा है। हर रोज ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। सड़क की हालत नहीं सुधारी जा रही है। - महिपाल सिंह राणा, ग्रामीण
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Iकई जगहों पर चढ़ाई अधिक है। इन जगहों पर मार्ग संकरा भी है। अधिक चढ़ाई होेने पर कई बार वाहन को धक्का लगाना पड़ता है। दुर्घटना की आशंका रहती है। - धर्मदत्त डिमरी, ग्राम प्रधान खरोड़ा
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Iअक्सर बारिश में मलबा सड़क पर आ जाता है। किसी के बीमार होने पर उसे डंडी कंडी के सहारे मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। नकदी फसलें भी मंडी तक पहुंचानी मुश्किल हो जाती हैं। - अजीत राणा, ग्राम प्रधान कुनैनI