{"_id":"67646057c3bfe84e1801a808","slug":"the-officer-itself-stood-in-the-way-of-removing-encroachment-from-government-lands-dehradun-news-c-5-1-drn1031-574241-2024-12-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: सरकारी जमीनों से कब्जा हटाने की राह में अफसर ही रोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: सरकारी जमीनों से कब्जा हटाने की राह में अफसर ही रोड़ा
विज्ञापन
Iजिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा-पीपी एक्ट में कार्रवाई से सालों तक सरकारी जमीनों से नहीं हट रहा कब्जा
I
I15 जनवरी से पहले सरकारी भूमि से अतिक्रमणों को चिह्नित कर उसे कब्जामुक्त कराने के दिए निर्देशI
Iसरकारी जमीनों से कब्जा हटवाने की राह में अफसर ही सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। अफसर अवैध कब्जों को हटाने के बजाय पीपी एक्ट में कार्यवाही कर रहे हैं। इससे कब्जा तत्काल नहीं हट पा रहा। सरकारी भवनों से कब्जेदारों का कब्जा हटवाने के लिए पीपी एक्ट का पालन किया जाता है। इसके अंतर्गत कब्जेदारों को हटाने से पहले बेदखली के नोटिस से लेकर नुकसान के भुगतान का प्रावधान है। यह अधिनियम सिर्फ सरकारी भवनों-परिसरों से कब्जेदारों को हटाने पर लागू होता है, लेकिन देहरादून में इस अधिनियम का बड़ा दुरुपयोग हो रहा है। पीपी एक्ट में सरकारी नोटिस की कार्यवाही में ही कई साल गुजर जा रहे हैं और कब्जेदार इसका लाभ उठा रहे हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने अफसरों के इस रवैये पर नाराजगी जताई है। चेतावनी देकर कहा, सभी विभाग 15 जनवरी से पहले अपनी विभागीय भूमि से अतिक्रमणों को चिह्नित कर उसे कब्जामुक्त करा लें।I
I
I
Iएसडीएम 21 दिन में निपटाएं पीपी एक्ट के सभी प्रकरणI
Iजिलाधिकारी सविन बंसल ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कर लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए। कहा, पीपी एक्ट सरकारी भूमि पर कब्जे के मामले में लागू नहीं होता, बल्कि सरकारी भवनों पर कब्जे के मामले में लागू होता है, सरकारी अफसर पीपी एक्ट की आड़ लेकर कब्जा हटाने की कार्रवाई से बचने का प्रयास न करें। सभी उपजिलाधिकारियों से कहा कि पीपी एक्ट के 21 दिन में प्रकरणों का निस्तारण करें। बैठक में प्रतिभाग न करने पर एक्सईएन एनएच व अधिशासी अधिकारी हरबर्टपुर का वेतन रोकने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि सभी विभाग अपनी-अपनी संपत्तियों से हटाए गए अतिक्रमण का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करें।I
I
I
Iएक नोटिस भेजें और सीधे कार्रवाई करें एसडीएम : डीएम
I
Iडीएम सविन बंसल ने कहा कि पीपी एक्ट का प्रयोग सिर्फ उस स्थिति में किया जाए जब सरकारी भवनों या इमारतों में रहने वालों का कब्जा हटवाने को लेकर विवाद हो। सामान्य परिस्थिति में अगर सरकारी जमीन पर कोई कब्जा है तो पीपी एक्ट का प्रयोग न करें। सीधे कब्जाधारक को एक नोटिस भेजकर जमीन खाली कराने के लिए ध्वस्तीकरण या जो भी कार्रवाई जरूरी हो की जाए।
विज्ञापन
I
I
I
Iसबसे फिसड्डी सिंचाई विभाग और ऋषिकेश प्रशासनI
Iअपनी सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने में सबसे फिसड्डी ऋषिकेश तहसील प्रशासन के अलावा सिंचाई विभाग है। सिंचाई विभाग की राजपुर रोड पर बेशकीमती जमीनें हैं, लेकिन विभागीय अफसर सरकारी जमीनों को ही कब्जामुक्त नहीं करा पा रहे हैं। यही हाल ऋषिकेश का है, डीएम ने चेतावनी देकर कहा कि कब्जा नहीं हटवा सके तो अफसरों पर एक्शन लिया जाएगा।I
I
I
Iमसूरी प्रशासन ने 15 भवन गिराए...90 को नोटिस जारी
I
Iडीएम ने मसूरी प्रशासन के प्रयासों को सराहा। कहा, एसडीएम अनामिका सिंह ने सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की। अब तक 15 बड़े भवनों को गिराया जा चुका है, जबकि 90 को नोटिस भेजा गया है। सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
I
I
I
Iक्या है पीपी एक्टI
Iसार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम सार्वजनिक परिसरों में अनाधिकृत रूप से रहने वालों को बेदखल करने का प्रावधान करता है। इसमें ध्वस्तीकरण से पूर्व बेदखली के लिए नोटिस का प्रावधान है। नोटिस के जवाब में कब्जेदार को नोटिस का जवाब देना होगा। एक प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही इस अधिनियम में कब्जे को हटवाया जाता है।I
विज्ञापन
I
I15 जनवरी से पहले सरकारी भूमि से अतिक्रमणों को चिह्नित कर उसे कब्जामुक्त कराने के दिए निर्देशI
Iसरकारी जमीनों से कब्जा हटवाने की राह में अफसर ही सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। अफसर अवैध कब्जों को हटाने के बजाय पीपी एक्ट में कार्यवाही कर रहे हैं। इससे कब्जा तत्काल नहीं हट पा रहा। सरकारी भवनों से कब्जेदारों का कब्जा हटवाने के लिए पीपी एक्ट का पालन किया जाता है। इसके अंतर्गत कब्जेदारों को हटाने से पहले बेदखली के नोटिस से लेकर नुकसान के भुगतान का प्रावधान है। यह अधिनियम सिर्फ सरकारी भवनों-परिसरों से कब्जेदारों को हटाने पर लागू होता है, लेकिन देहरादून में इस अधिनियम का बड़ा दुरुपयोग हो रहा है। पीपी एक्ट में सरकारी नोटिस की कार्यवाही में ही कई साल गुजर जा रहे हैं और कब्जेदार इसका लाभ उठा रहे हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने अफसरों के इस रवैये पर नाराजगी जताई है। चेतावनी देकर कहा, सभी विभाग 15 जनवरी से पहले अपनी विभागीय भूमि से अतिक्रमणों को चिह्नित कर उसे कब्जामुक्त करा लें।I
I
I
Iएसडीएम 21 दिन में निपटाएं पीपी एक्ट के सभी प्रकरणI
Iजिलाधिकारी सविन बंसल ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कर लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए। कहा, पीपी एक्ट सरकारी भूमि पर कब्जे के मामले में लागू नहीं होता, बल्कि सरकारी भवनों पर कब्जे के मामले में लागू होता है, सरकारी अफसर पीपी एक्ट की आड़ लेकर कब्जा हटाने की कार्रवाई से बचने का प्रयास न करें। सभी उपजिलाधिकारियों से कहा कि पीपी एक्ट के 21 दिन में प्रकरणों का निस्तारण करें। बैठक में प्रतिभाग न करने पर एक्सईएन एनएच व अधिशासी अधिकारी हरबर्टपुर का वेतन रोकने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि सभी विभाग अपनी-अपनी संपत्तियों से हटाए गए अतिक्रमण का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करें।I
विज्ञापन
I
I
Iएक नोटिस भेजें और सीधे कार्रवाई करें एसडीएम : डीएम
I
Iडीएम सविन बंसल ने कहा कि पीपी एक्ट का प्रयोग सिर्फ उस स्थिति में किया जाए जब सरकारी भवनों या इमारतों में रहने वालों का कब्जा हटवाने को लेकर विवाद हो। सामान्य परिस्थिति में अगर सरकारी जमीन पर कोई कब्जा है तो पीपी एक्ट का प्रयोग न करें। सीधे कब्जाधारक को एक नोटिस भेजकर जमीन खाली कराने के लिए ध्वस्तीकरण या जो भी कार्रवाई जरूरी हो की जाए।
विज्ञापन
I
I
I
Iसबसे फिसड्डी सिंचाई विभाग और ऋषिकेश प्रशासनI
Iअपनी सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने में सबसे फिसड्डी ऋषिकेश तहसील प्रशासन के अलावा सिंचाई विभाग है। सिंचाई विभाग की राजपुर रोड पर बेशकीमती जमीनें हैं, लेकिन विभागीय अफसर सरकारी जमीनों को ही कब्जामुक्त नहीं करा पा रहे हैं। यही हाल ऋषिकेश का है, डीएम ने चेतावनी देकर कहा कि कब्जा नहीं हटवा सके तो अफसरों पर एक्शन लिया जाएगा।I
I
I
Iमसूरी प्रशासन ने 15 भवन गिराए...90 को नोटिस जारी
I
Iडीएम ने मसूरी प्रशासन के प्रयासों को सराहा। कहा, एसडीएम अनामिका सिंह ने सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की। अब तक 15 बड़े भवनों को गिराया जा चुका है, जबकि 90 को नोटिस भेजा गया है। सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
I
I
I
Iक्या है पीपी एक्टI
Iसार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम सार्वजनिक परिसरों में अनाधिकृत रूप से रहने वालों को बेदखल करने का प्रावधान करता है। इसमें ध्वस्तीकरण से पूर्व बेदखली के लिए नोटिस का प्रावधान है। नोटिस के जवाब में कब्जेदार को नोटिस का जवाब देना होगा। एक प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही इस अधिनियम में कब्जे को हटवाया जाता है।I