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Dehradun News: आरोपियों के डिफाल्ट बेल लेने पर लगेगा नए कानूनों में अंकुश
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I- 60 से 90 दिन के भीतर चार्जशीट नहीं लगी तो अनुमति से 180 दिन बढ़ सकती है अवधि
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I- अभी तय समयावधि में चार्जशीट दाखिल न होने पर मिल जाती है आरोपियों को जमानतI
नए कानूनों में आरोपियों को डिफाल्ट बेल मिलने पर भी अंकुश लग सकता है। आरोपियों को तय मियाद में चार्जशीट दाखिल न होने पर जमानत मिल जाती थी, लेकिन अब विवेचना अधिकारी वाजिब कारण बताकर चार्जशीट दाखिल करने की अवधि को बढ़वा भी सकते हैं। इसमें आरोपियों और कुछेक पुलिसकर्मियों की सेटिंग गेटिंग पर भी लगाम लगेगा। इसका प्रावधान अब सीआरपीसी की जगह आ रही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में किया गया है।
बता दें कि मुकदमों में चार्जशीट दाखिल करने के लिए विवेचना अधिकारियों को 60 से 90 दिन का समय मिलता था। इस बीच आरोपी यदि जेल में होता है तो उसे चार्जशीट दाखिल होने तक जमानत नहीं मिल सकती है। ऐसे में किसी स्थिति में अगर विवेचना अधिकारी चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाया तो आरोपी को डिफाल्ट बेल यानी जमानत मिल जाती है, लेकिन अब इस तरह से डिफाल्ट बेल मिलना आसान नहीं होगा। कारण है कि अब बीएनएसएस में प्रावधान किया गया है कि यदि विवेचना अधिकारी को लगता है कि चार्जशीट के लिए कुछ और तथ्य जुटाने हैं तो वह समयावधि को बढ़वा सकता है।
इसके लिए उसे 180 दिन का समय मिल सकता है। इस तरह जो आरोपी डिफाल्ट बेल पाने की जुगत में लगे रहते हैं, उनके प्रयास विफल हो जाएंगे। माना यह भी जा रहा है कि कुछ मामलों में आरोपी पुलिस के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर सेटिंग-गेटिंग भी करते हैं। अब ऐसा करना भी मुश्किल हो जाएगा।
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I60 से 90 दिन में कभी भी 15 दिन की पीसीआरI
अभी तक किसी आरोपी से यदि पुलिस को कुछ बरामद कराना होता था या पूछताछ करनी होती तो शुरुआती 15 दिन में ही पुलिस कस्टडी रिमांड ली जाती है, लेकिन अब विवेचना अधिकारी चार्जशीट दाखिल होने की मियाद 60 से 90 दिन के भीतर कभी भी 15 दिन की पीसीआर ले सकता है। ऐसा करने से पुलिस को भी तथ्य जुटाने में आसानी होगी।
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I- अभी तय समयावधि में चार्जशीट दाखिल न होने पर मिल जाती है आरोपियों को जमानतI
नए कानूनों में आरोपियों को डिफाल्ट बेल मिलने पर भी अंकुश लग सकता है। आरोपियों को तय मियाद में चार्जशीट दाखिल न होने पर जमानत मिल जाती थी, लेकिन अब विवेचना अधिकारी वाजिब कारण बताकर चार्जशीट दाखिल करने की अवधि को बढ़वा भी सकते हैं। इसमें आरोपियों और कुछेक पुलिसकर्मियों की सेटिंग गेटिंग पर भी लगाम लगेगा। इसका प्रावधान अब सीआरपीसी की जगह आ रही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में किया गया है।
बता दें कि मुकदमों में चार्जशीट दाखिल करने के लिए विवेचना अधिकारियों को 60 से 90 दिन का समय मिलता था। इस बीच आरोपी यदि जेल में होता है तो उसे चार्जशीट दाखिल होने तक जमानत नहीं मिल सकती है। ऐसे में किसी स्थिति में अगर विवेचना अधिकारी चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाया तो आरोपी को डिफाल्ट बेल यानी जमानत मिल जाती है, लेकिन अब इस तरह से डिफाल्ट बेल मिलना आसान नहीं होगा। कारण है कि अब बीएनएसएस में प्रावधान किया गया है कि यदि विवेचना अधिकारी को लगता है कि चार्जशीट के लिए कुछ और तथ्य जुटाने हैं तो वह समयावधि को बढ़वा सकता है।
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इसके लिए उसे 180 दिन का समय मिल सकता है। इस तरह जो आरोपी डिफाल्ट बेल पाने की जुगत में लगे रहते हैं, उनके प्रयास विफल हो जाएंगे। माना यह भी जा रहा है कि कुछ मामलों में आरोपी पुलिस के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर सेटिंग-गेटिंग भी करते हैं। अब ऐसा करना भी मुश्किल हो जाएगा।
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I60 से 90 दिन में कभी भी 15 दिन की पीसीआरI
अभी तक किसी आरोपी से यदि पुलिस को कुछ बरामद कराना होता था या पूछताछ करनी होती तो शुरुआती 15 दिन में ही पुलिस कस्टडी रिमांड ली जाती है, लेकिन अब विवेचना अधिकारी चार्जशीट दाखिल होने की मियाद 60 से 90 दिन के भीतर कभी भी 15 दिन की पीसीआर ले सकता है। ऐसा करने से पुलिस को भी तथ्य जुटाने में आसानी होगी।