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रुड़कीः विवाहिता आत्महत्या मामले में दोबारा होगी विवेचना, डीजीपी ने दिए जांच के आदेश
Sun, 28 Mar 2021 10:25 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 28 Mar 2021 10:25 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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रुड़की में करीब ढाई साल पहले हुई विवाहिता की आत्महत्या के मामले में डीजीपी ने दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने इस मामले साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा चुकी है। लापरवाह अधिकारियों ने दहेज हत्या के मुकदमे को आत्महत्या के लिए उकसाने का बना दिया। डीजीपी ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश भी दिए हैं।
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डीजीपी ने सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी
इसके साथ ही पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हरिद्वार को सौंपते हुए सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 27 अगस्त 2018 को कविता ने आत्महत्या कर ली थी। अभी शादी को चार साल भी पूरे नहीं हुए थे। जनकपुरी, मुजफ्फरनगर निवासी उसके पिता ने गंगनहर कोतवाली में पति व अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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लापरवाह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए
इस मुकदमे में गंगनहर पुलिस अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में भेज चुकी है। प्रकरण में अब फिर से मृतका के पिता ने डीजीपी अशोक कुमार से शिकायत की थी। दोनों पक्षों को सुनते हुए डीजीपी ने मुकदमे की विवेचना करने वाले लापरवाह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं।
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मुकदमा आत्महत्या के उकसाने का नहीं बल्कि दहेज हत्या की धाराओं में होना था
डीजीपी ने बताया कि समीक्षा के दौरान पाया गया कि महिला की मौत शादी के सात वर्ष के भीतर हुई थी। लिहाजा मुकदमा आत्महत्या के उकसाने का नहीं बल्कि दहेज हत्या की धाराओं में होना था। लापरवाही की हद तो तब हुई जब महिला की ओर से दर्ज कराए गए पुराने मुकदमे को भी नहीं देखा गया। 2017 में उसने दहेज उत्पीड़न के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस पूरे मामले में सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।