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Dehradun News: दून अस्पताल की कम सैलरी से नौकरी पर नहीं आ रहे डॉक्टर
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I- निजी अस्पताल में डॉक्टरों को मिल रही सरकारी से तीन गुना अधिक सैलरीI
दून मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले डॉक्टरों को मिल रही कम सैलरी मरीजों के इलाज में बाधा बन रही है। यहां पर डॉक्टर नौकरी छोड़कर जाते हैं और नए डॉक्टर नौकरी पर नहीं आ रहे हैं। इससे मरीजों को इलाज में मुश्किल हो रही है। क्योंकि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। पद रिक्त होने के बाद भी डॉक्टर नौकरी पर नहीं आ रहे हैं। इंटरव्यू में भी कम डॉक्टर ही पहुंच रहे हैं।
बता दें कि दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक रहती है। मरीज इलाज के लिए आते हैं लेकिन यहां पर सभी डॉक्टर भी नहीं मौजूद हैं। ऐसे में मरीजों को मुश्किल होती है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। न्यूरो फिजिशियन भी नहीं हैं और ह्रदय रोग विशेषज्ञ भी एक ही हैं। सभी विभाग पूरे नहीं हैं। कुछ विभाग विभागाध्यक्ष के बिना ही चल रहे हैं।
दून मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के लिए 1.43 लाख, एसोसिएट के लिए 1.23 लाख और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 95000 रुपये वेतन है। जबकि, निजी मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में वेतन इसका तीन गुना है। कम सैलरी के चलते कई विभागों के डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। वहीं, कई पद खाली पड़े हैं लेकिन डॉक्टर नहीं आ रहे हैं। एमबीबीएस और पीजी की मान्यता को लेकर दिसंबर के पहले हफ्ते एनएमसी का दौ हो सकता है। विभागों में फैकल्टी की कमी होने से मान्यता पर भी संकट का खतरा है।
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दून मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले डॉक्टरों को मिल रही कम सैलरी मरीजों के इलाज में बाधा बन रही है। यहां पर डॉक्टर नौकरी छोड़कर जाते हैं और नए डॉक्टर नौकरी पर नहीं आ रहे हैं। इससे मरीजों को इलाज में मुश्किल हो रही है। क्योंकि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। पद रिक्त होने के बाद भी डॉक्टर नौकरी पर नहीं आ रहे हैं। इंटरव्यू में भी कम डॉक्टर ही पहुंच रहे हैं।
बता दें कि दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक रहती है। मरीज इलाज के लिए आते हैं लेकिन यहां पर सभी डॉक्टर भी नहीं मौजूद हैं। ऐसे में मरीजों को मुश्किल होती है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। न्यूरो फिजिशियन भी नहीं हैं और ह्रदय रोग विशेषज्ञ भी एक ही हैं। सभी विभाग पूरे नहीं हैं। कुछ विभाग विभागाध्यक्ष के बिना ही चल रहे हैं।
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दून मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के लिए 1.43 लाख, एसोसिएट के लिए 1.23 लाख और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 95000 रुपये वेतन है। जबकि, निजी मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में वेतन इसका तीन गुना है। कम सैलरी के चलते कई विभागों के डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। वहीं, कई पद खाली पड़े हैं लेकिन डॉक्टर नहीं आ रहे हैं। एमबीबीएस और पीजी की मान्यता को लेकर दिसंबर के पहले हफ्ते एनएमसी का दौ हो सकता है। विभागों में फैकल्टी की कमी होने से मान्यता पर भी संकट का खतरा है।
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