फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   The ELISA machine has been kept in the store room of

Dehradun News: स्टोर में एलाइजा मशीन, रैपिड जांच से खानापूर्ति

Sun, 03 Sep 2023 12:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 03 Sep 2023 12:45 AM IST
विज्ञापन
The ELISA machine has been kept in the store room of
उप जिला अस्पताल : रैपिड जांच में अब तक मिले 102 पॉजिटिव
विज्ञापन




एलाइजा जांच न होने से सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हुए मामले



उप जिला अस्पताल में करीब एक साल से एलाइजा मशीन पैथोलॉजी विभाग के स्टोर रूम रखी है। वहींं जांच के लिए प्रयोग होने वाला रिएजेंट भी खराब हो चुका है। डेंगू के संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की केवल रैपिड जांच की जा रही है। रैपिड जांच के मामले सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हो रहे हैं।



शनिवार को अस्पताल में मामले की पड़ताल के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। अस्पताल को करीब एक साल पहले एलाइजा मशीन मिली थी। एलाइजा मशीन की टेस्टिंग हुई और इससे कुछ जांचें भी की गई है, लेकिन इसके बाद मशीन को पैथोलॉजी विभाग के स्टोर रूम के एक पेटी में बंद कर रख दिया गया।
विज्ञापन




एलाइजा जांच में उपयोग होने वाले रिएजेंट की बोतल खुलने के बाद उसको निर्धारित समय पर उपयोग करना होता है। लंबे समय से प्रयोग न होने के चलते रिएजेंट खराब हो गया है। अस्पताल प्रशासन कभी तकनीकी कमी तो कभी लैब तकनीशियन के टोटे का हवाला देकर एलाइजा जांच से अपना पल्ला झाड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन





रैपिड जांच में मरीज की मौत तो नहीं होती दर्ज

स्वास्थ्य विभाग रैपिड जांच को डेंगू की पुष्टि नहीं मानता है। रैपिड पॉजिटिव विभाग की नजर में केवल डेंगू संदिग्ध मरीज होते हैं। केवल एलाइजा जांच में पॉजिटिव आने वाले मरीज को ही सरकारी आंकड़ों में दर्ज किया जाता है। ऐसे में संदिग्ध मरीजों की मौत हो जाए तो सरकारी आंकड़ों में वह दर्ज नहीं होती है। यही कारण है डेंगू से हकीकत में हुई मौतों और सरकारी आंकड़ों में जमीन आसमान का अंतर होता है।






छोटे अस्पतालों में केवल रैपिड जांच

उप जिला अस्पताल विकासनगर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालसी, सीएचसी साहिया और सीएचसी चकराता में मरीजों की केवल रैपिड जांच होती है। कई बार संक्रमण कम न होने और अन्य दिक्कतों के चलते मरीज देहरादून के अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके बाद मामले देहरादून में ही रिपोर्ट होते हैं। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर केवल रैपिड जांच के आंकड़े हैं, जो स्वास्थ्य विभाग की नजर में संदिग्ध मरीज हैं।






विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed