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तीन साल तक सुरक्षित रखना होगा मरीजों का ब्यौरा
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देहरादून। डॉक्टरों को अब अपने मरीजों का ब्यौरा तीन साल तक सुरक्षित रखना होगा। किसी मरीज या फिर किसी जांच एजेंसी द्वारा संबंधित मरीज का ब्यौरा मांगे जाने पर उसे 72 घंटे के भीतर मुहैया कराना होगा। यह निर्देश कोरोनेशन अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीसी रमोला ने सभी चिकित्साधिकारियाें को जारी किए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी डॉक्टर जिस दिन से मरीज का इलाज शुरू करें, उस दिन से लेकर अगले तीन साल तक उसका तमाम ब्यौरा सुरक्षित रखा जाय। मसलन मरीज का नाम, पता व उसे होने वाली बीमारी के साथ ही इलाज से संबंधित तमाम जानकारियां सुरक्षित रखी जाएं। इतना ही नहीं मरीज को चिकित्सा अवकाश स्वीकृत करते समय मरीज के शरीर या चेहरे पर पाए जाने वाले किसी निशान का जिक्र चिकित्सा अवकाश प्रमाणपत्र पर जरूर अंकित किया जाय। साथ ही चिकित्सक अपने सामने ही मरीज का हस्ताक्षर या फिर उसका अंगूठा अपने सामने जरूर लगवाएं।
बता दें, कोरोनेशन अस्पताल के साथ ही दून अस्पताल, गांधी शताब्दी जैसे सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा जो भी चिकित्सा अवकाश प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं उसमें इन तमाम प्रावधानाें का पालन नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक आदेश जारी किया है कि देश भर के चिकित्सा अपने यहां आने वाले मरीजों का डाटा बैंक तैयार करें ताकि इस बात पता लगाया जा सके, कि कौन कौन सी बीमारियां ज्यादा फैल रही हैं और उसे रोकने को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी डॉक्टर जिस दिन से मरीज का इलाज शुरू करें, उस दिन से लेकर अगले तीन साल तक उसका तमाम ब्यौरा सुरक्षित रखा जाय। मसलन मरीज का नाम, पता व उसे होने वाली बीमारी के साथ ही इलाज से संबंधित तमाम जानकारियां सुरक्षित रखी जाएं। इतना ही नहीं मरीज को चिकित्सा अवकाश स्वीकृत करते समय मरीज के शरीर या चेहरे पर पाए जाने वाले किसी निशान का जिक्र चिकित्सा अवकाश प्रमाणपत्र पर जरूर अंकित किया जाय। साथ ही चिकित्सक अपने सामने ही मरीज का हस्ताक्षर या फिर उसका अंगूठा अपने सामने जरूर लगवाएं।
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बता दें, कोरोनेशन अस्पताल के साथ ही दून अस्पताल, गांधी शताब्दी जैसे सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा जो भी चिकित्सा अवकाश प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं उसमें इन तमाम प्रावधानाें का पालन नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक आदेश जारी किया है कि देश भर के चिकित्सा अपने यहां आने वाले मरीजों का डाटा बैंक तैयार करें ताकि इस बात पता लगाया जा सके, कि कौन कौन सी बीमारियां ज्यादा फैल रही हैं और उसे रोकने को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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