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67 साल बाद अश्वमेध यज्ञ स्थल राष्ट्रीय स्मारक घोषित
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जगतग्राम बाड़वाला स्थित प्राचीन अश्वमेध यज्ञ स्थल।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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आखिरकार 67 साल के लंबे इंतजार के बाद जगतग्राम बाड़वाला स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिल ही गया। अब तक राष्ट्रीय स्मारक घोषित न होने के कारण पुरातत्व विभाग इस स्थल की सही ढंग से देखभाल नहीं कर पा रहा था। लेकिन, राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने के बाद इस जगह के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। हाल ही में अश्वमेध यज्ञ स्थल को राष्ट्रीय स्मारक की सूची में डाला गया है।
सहायक पुरातत्वविद् डॉ. राजीव पांडेय का कहना है कि वर्ष 1952-53 में जगतग्राम बाड़वाला में अश्वमेध यज्ञ स्थल होने के सबूत मिले थे। जिसके बाद यहां पर पुरातात्विक उत्खनन कार्य शुरू किया गया था। जिसमें तीसरी शताब्दी की कई यज्ञ वेदिकाएं निकली। जिसके बाद इस जगह को आर्कियोजिकल साइट के रूप में पुरातत्व विभाग ने अंडरटेक कर लिया। तब इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाने अंतरिम अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी। लेकिन अब तक स्थल को पूर्ण रूप से राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं मिल सका था। लेकिन अब राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने के बाद इस स्थल के आसपास विकास कार्यों में तेजी आ सकेगी। यज्ञ वेदिकाओं के ऊपर शेल्टर निर्माण कार्य भी कराया जा सकेगा।
3697 हुई राष्ट्रीय स्मारकों की संख्या
इस साल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) विभाग ने देश की संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित करने के लिए कुल 11 स्मारकों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का रिकॉर्ड कायम किया है। इन 11 स्मारकों के जुड़ने के बाद अब देश में राष्ट्रीय स्मारकों की संख्या कुल 3697 हो गयी। राष्ट्रीय स्मारकों की सूची में शामिल किए गए यह स्थल उत्तराखंड, ओडिशा, यूपी, राजस्थान, केरल और जम्मू कश्मीर में स्थित हैं।
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एक यज्ञ वेदिका का खोज अभी भी बाकी
सन 1952 से 1954 के बीच में एएसआई की टीम ने जगतग्राम में अश्वमेध यज्ञ स्थल की खोज की थी। यहां उत्खनन में टीम को तीन यज्ञ वेदिकाएं प्राप्त हुई जिन्हें पक्की इंटों से बनाया गया था और इनका आकर उड़ते हुए गरुड़ की तरह था। इन वेदिकाओं के अध्ययन के बाद ये सामने आया की पहली से पांचवीं सदी के बीच वर्तमान सरसावा, हरिपुर, विकासनगर और संभवत: लाखामंडल तक बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश का साम्रज्य था। जिसकी राजधानी हरिपुर थी। इस साम्राज्य का सबसे महत्वपूर्ण काल तीसरी शताब्दी रहा। जब इस राज्य पर शील वर्मन नामक परम शक्तिशाली राजा राज करते थे। कहा जाता है की उन्होंने ही जगतग्राम में चार अश्वमेध यज्ञ किए थे। जिनमें से तीन वेदिकाओं को उत्खनन कर बाहर निकाला जा चुका है। जबकि, चौथे को अभी खोजना बाकी है।
सड़क निर्माण की जगी उम्मीद
बाड़वाला जगतग्राम स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल आम के बागानों के बीच में स्थित है। ऐसे में इस स्थल तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। बाहर से आने वाले पर्यटकों को यज्ञ स्थल तक पहुंचने के लिए आम के बागों के बीच में पैदल चल यहां तक पहुंचना पड़ता है। लंबे समय से स्थानीय लोग यज्ञ स्थल तक रास्ता बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, बागान स्वामी और विभाग के बीच समन्वय न बैठने के कारण यह अब तक मुमकिन नहीं हो सका है। ऐसे में राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने के बाद उम्मीद जगी है। इस स्थल तक सड़क पहुंचाने में केंद्र सरकार भी दिलचस्पी लेगी।
वर्जन,,,,,,,,,,,
हाल ही में अश्वमेध यज्ञ स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। जिसके बाद यहां पर यज्ञ स्थल के संरक्षण के लिए विकास कार्य कराए जा सकेंगे। सड़क निर्माण की संभावनाओं को तलाशने में भी तेजी आएगी।
-डॉ. आरके पटेल, अधीक्षण पुरातत्वविद् पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग
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सहायक पुरातत्वविद् डॉ. राजीव पांडेय का कहना है कि वर्ष 1952-53 में जगतग्राम बाड़वाला में अश्वमेध यज्ञ स्थल होने के सबूत मिले थे। जिसके बाद यहां पर पुरातात्विक उत्खनन कार्य शुरू किया गया था। जिसमें तीसरी शताब्दी की कई यज्ञ वेदिकाएं निकली। जिसके बाद इस जगह को आर्कियोजिकल साइट के रूप में पुरातत्व विभाग ने अंडरटेक कर लिया। तब इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाने अंतरिम अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी। लेकिन अब तक स्थल को पूर्ण रूप से राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं मिल सका था। लेकिन अब राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने के बाद इस स्थल के आसपास विकास कार्यों में तेजी आ सकेगी। यज्ञ वेदिकाओं के ऊपर शेल्टर निर्माण कार्य भी कराया जा सकेगा।
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3697 हुई राष्ट्रीय स्मारकों की संख्या
इस साल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) विभाग ने देश की संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित करने के लिए कुल 11 स्मारकों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का रिकॉर्ड कायम किया है। इन 11 स्मारकों के जुड़ने के बाद अब देश में राष्ट्रीय स्मारकों की संख्या कुल 3697 हो गयी। राष्ट्रीय स्मारकों की सूची में शामिल किए गए यह स्थल उत्तराखंड, ओडिशा, यूपी, राजस्थान, केरल और जम्मू कश्मीर में स्थित हैं।
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एक यज्ञ वेदिका का खोज अभी भी बाकी
सन 1952 से 1954 के बीच में एएसआई की टीम ने जगतग्राम में अश्वमेध यज्ञ स्थल की खोज की थी। यहां उत्खनन में टीम को तीन यज्ञ वेदिकाएं प्राप्त हुई जिन्हें पक्की इंटों से बनाया गया था और इनका आकर उड़ते हुए गरुड़ की तरह था। इन वेदिकाओं के अध्ययन के बाद ये सामने आया की पहली से पांचवीं सदी के बीच वर्तमान सरसावा, हरिपुर, विकासनगर और संभवत: लाखामंडल तक बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश का साम्रज्य था। जिसकी राजधानी हरिपुर थी। इस साम्राज्य का सबसे महत्वपूर्ण काल तीसरी शताब्दी रहा। जब इस राज्य पर शील वर्मन नामक परम शक्तिशाली राजा राज करते थे। कहा जाता है की उन्होंने ही जगतग्राम में चार अश्वमेध यज्ञ किए थे। जिनमें से तीन वेदिकाओं को उत्खनन कर बाहर निकाला जा चुका है। जबकि, चौथे को अभी खोजना बाकी है।
सड़क निर्माण की जगी उम्मीद
बाड़वाला जगतग्राम स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल आम के बागानों के बीच में स्थित है। ऐसे में इस स्थल तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। बाहर से आने वाले पर्यटकों को यज्ञ स्थल तक पहुंचने के लिए आम के बागों के बीच में पैदल चल यहां तक पहुंचना पड़ता है। लंबे समय से स्थानीय लोग यज्ञ स्थल तक रास्ता बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, बागान स्वामी और विभाग के बीच समन्वय न बैठने के कारण यह अब तक मुमकिन नहीं हो सका है। ऐसे में राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने के बाद उम्मीद जगी है। इस स्थल तक सड़क पहुंचाने में केंद्र सरकार भी दिलचस्पी लेगी।
वर्जन,,,,,,,,,,,
हाल ही में अश्वमेध यज्ञ स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। जिसके बाद यहां पर यज्ञ स्थल के संरक्षण के लिए विकास कार्य कराए जा सकेंगे। सड़क निर्माण की संभावनाओं को तलाशने में भी तेजी आएगी।
-डॉ. आरके पटेल, अधीक्षण पुरातत्वविद् पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग