Dehradun: चार साल तक युवती से दुष्कर्म करने के आरोपी को न्यायालय ने किया बरी, मामले में दिया ये मत
युवती का कहना था कि वह 2015 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक कोचिंग सेंटर में ट्रेनिंग कर रही थी। इसी दौरान उमाशंकर निवासी मसूरी से उसकी मुलाकात हुई। उमाशंकर ईसाई धर्म को मानने वाला था। उसने यह बात छिपाते हुए युवती के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।
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शादी का झांसा देकर युवती से चार सालों तक दुष्कर्म करने के आरोपी को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने इस मामले में अपना मत दिया और कहा कि किसी भी पढ़ी-लिखी युवती को चार साल तक किसी तथ्य के भ्रम में नहीं रखा जा सकता। ऐसे में यह मामला किसी भी परिस्थिति में दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सौरभ दुसेजा ने बताया कि 11 नवंबर 2019 को एक युवती ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। युवती का कहना था कि वह 2015 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक कोचिंग सेंटर में ट्रेनिंग कर रही थी। इसी दौरान उमाशंकर निवासी मसूरी से उसकी मुलाकात हुई। उमाशंकर ईसाई धर्म को मानने वाला था। उसने यह बात छिपाते हुए युवती के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को उसने मान लिया और उमाशंकर से मिलती-जुलती रही। युवती का आरोप था कि इसके बाद उमाशंकर ने उसके साथ शादी का झांसा देते हुए कई बार दुष्कर्म किया।
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वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक कई बार वह होटल व रिजॉर्ट आदि में ले गया और वहां भी दुष्कर्म किया। आरोप यह था कि जब उसने शादी का दबाव डाला तो वह उसे जान से मारने की धमकी देने लगा और शादी से साफ इन्कार कर दिया। मामले में पुलिस ने आरोपी उमाशंकर के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। करीब चार सालों तक मुकदमा चला। लेकिन, अभियोजन इस मामले को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अब स्पेशल फास्ट ट्रैक जज पंकज तोमर ने आरोपी उमाशंकर को बरी कर दिया।