{"_id":"62d5bb1660071015d669988c","slug":"the-company-will-have-to-pay-term-insurance-claim-with-interest-city-news-drn417588535","type":"story","status":"publish","title_hn":"कंपनी को ब्याज सहित देना होगा टर्म इंश्योरेंस का क्लेम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कंपनी को ब्याज सहित देना होगा टर्म इंश्योरेंस का क्लेम
विज्ञापन
मृत्यु के बाद टर्म इंश्योरेंस का क्लेम न चुकाने वाली कंपनी को अब ब्याज सहित बीमाधारक के परिजनों को देना होगा। स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं। कंपनी ने टर्म इंश्योरेंस की 51 लाख रुपये की रकम में से केवल 35 हजार रुपये देकर ही पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन स्थायी लोक अदालत ने कंपनी के रवैये को गलत बताया है।
लोक अदालत को लक्ष्मी त्यागी ने शिकायत कर बताया था कि बेटे मनीष त्यागी ने एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से 21 अगस्त 2019 को टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। इसका मृत्यु के बाद 51 लाख रुपये मिलना था। इस पॉलिसी में मनीष ने अपनी मां को नामिनी बनाया था। मनीष की 16 सितंबर 2021 को मृत्यु हो गई। उस वक्त उसकी आयु केवल 33 वर्ष थी। मनीष की मृत्यु के बाद लक्ष्मी को बीमा के दस्तावेज मिले। उन्होंने कंपनी को इत्तला की और क्लेम किया। कंपनी का एजेंट फार्म आदि भरकर ले गया और जल्द पैसे खाते में भेजने की बात कहा। कंपनी ने 19 नवंबर 2021 को केवल 35 हजार रुपये खाते में भेजकर इतिश्री कर डाली।
कंपनी ने तर्क दिया कि मनीष ने सितंबर 2021 की किश्त नहीं भेजी, जबकि मनीष की मौत 16 सितंबर को हुई और किश्त की देय तारीख 20 रहती है। स्थायी लोक अदालत ने कंपनी का यह तर्क खारिज कर दिया। लोक अदालत के अध्यक्ष राजीव कुमार, सदस्य मंजुश्री सकलानी और उपेंद्र सिंह ने आदेश किया कि गलत तथ्यों पर बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज किया। कंपनी को 51 लाख रुपये क्लेम में से 35 हजार घटाकर क्लेम राशि दिसंबर 2021 से छह प्रतिशत ब्याज की दर से जमा करनी होगी। कंपनी को मानसिक और शारीरिक संवेदना के रूप में 35 हजार और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
लोक अदालत को लक्ष्मी त्यागी ने शिकायत कर बताया था कि बेटे मनीष त्यागी ने एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से 21 अगस्त 2019 को टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। इसका मृत्यु के बाद 51 लाख रुपये मिलना था। इस पॉलिसी में मनीष ने अपनी मां को नामिनी बनाया था। मनीष की 16 सितंबर 2021 को मृत्यु हो गई। उस वक्त उसकी आयु केवल 33 वर्ष थी। मनीष की मृत्यु के बाद लक्ष्मी को बीमा के दस्तावेज मिले। उन्होंने कंपनी को इत्तला की और क्लेम किया। कंपनी का एजेंट फार्म आदि भरकर ले गया और जल्द पैसे खाते में भेजने की बात कहा। कंपनी ने 19 नवंबर 2021 को केवल 35 हजार रुपये खाते में भेजकर इतिश्री कर डाली।
विज्ञापन
कंपनी ने तर्क दिया कि मनीष ने सितंबर 2021 की किश्त नहीं भेजी, जबकि मनीष की मौत 16 सितंबर को हुई और किश्त की देय तारीख 20 रहती है। स्थायी लोक अदालत ने कंपनी का यह तर्क खारिज कर दिया। लोक अदालत के अध्यक्ष राजीव कुमार, सदस्य मंजुश्री सकलानी और उपेंद्र सिंह ने आदेश किया कि गलत तथ्यों पर बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज किया। कंपनी को 51 लाख रुपये क्लेम में से 35 हजार घटाकर क्लेम राशि दिसंबर 2021 से छह प्रतिशत ब्याज की दर से जमा करनी होगी। कंपनी को मानसिक और शारीरिक संवेदना के रूप में 35 हजार और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे।
विज्ञापन