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Dehradun News: अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
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2014 से लेकर 2022 तक लगातार काटे जाते रहे साल के पेड़
बाड़वाला स्थित एनफील्ड टी स्टेट कंपनी की जमीन से भारी संख्या में बिना अनुमति के काटे गए साल के पेड़ का मामला परत दर परत खुल रहा है। नौ साल के लंबे समय में क्षेत्र में तैनात रहे वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि पेड़ कटते रहे और वह चुपचाप देखते रहे। मिलीभगत के बिना क्या यह सब संभव था। याचिकाकर्ता का कहना है कि निष्पक्ष जांच हो तो कई अधिकारी भी इसमें संलिप्त पाए जाएंगे।
बाड़वाला के राजावाला जंगल में बिना अनुमति के काटे गए पेड़ मामले को लेकर हाईकोर्ट सख्त रवैया अपनाए हुए है। हाईकोर्ट में याचिका डालने वाले राकेश तोमर उत्तराखंडी के माध्यम से मांगी गई एक सूचना पर नजर डाली जाए तो उससे साफ है कि 2021 में विभाग ने मान लिया था कि भूमि पर साल के पेड़ों का कटान हो रहा है। 16 अगस्त 2021 तक 552 पेड़ काटे गए, जिसके आधार पर विभाग ने 11 मुकदमे दर्ज करके दो लाख 49 हजार रुपये प्रतिकर वसूला।
इसके अलावा विभाग ने मौके से 360 बल्लीनुमा नग या 12़638 घनमीटर लकड़ी बरामद की। याचिकाकर्ता का आरोप है कि भूमि पर 2014 से लगातार कटान चल रहा था। कई हजार पेड़ काटकर भूमि का समतलीकरण कर दिया गया। कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े अधिकारी भी घेरे में आएंगे।
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छह रेंजर व पांच डीएफओ रहे तैनात
बाड़वाला का यह क्षेत्र कालसी वन प्रभाग की चौहड़पुर रेंज में आता है। 2014 में वन प्रभाग में रामगोपाल वर्मा डीएफओ रहे। इसके बाद से सुरेंद्र कुमार, श्रीप्रकाश शर्मा, बीबी मार्तोलिया, नितिशमणी त्रिपाठी डीएफओ रहे। इसी प्रकार से चौहड़पुर रेंज में 2014 में राजेंद्र सिंह रावत रेंजर रहे। उसके बाद से बीडी सकलानी, महावीर सिंह रावत, दिनेश लाल, कुलदीप सिंह पंवार, एडी सिद्दीकी रेंजर रहे।
अभी तक कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशन में चल रही कार्रवाई में अभी तक वन विभाग ने एक रेंजर एडी सिद्दीका, दो वन दरोगा रीता रमोला, महावीर सिंह चौहान, नायब तहसीलदार जयसिंह सैनी को निलंबित किया गया है। इसके अलावा वन दरोगा संजीव दूबे का ट्रांसफर किया जा चुका है।
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बाड़वाला स्थित एनफील्ड टी स्टेट कंपनी की जमीन से भारी संख्या में बिना अनुमति के काटे गए साल के पेड़ का मामला परत दर परत खुल रहा है। नौ साल के लंबे समय में क्षेत्र में तैनात रहे वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि पेड़ कटते रहे और वह चुपचाप देखते रहे। मिलीभगत के बिना क्या यह सब संभव था। याचिकाकर्ता का कहना है कि निष्पक्ष जांच हो तो कई अधिकारी भी इसमें संलिप्त पाए जाएंगे।
बाड़वाला के राजावाला जंगल में बिना अनुमति के काटे गए पेड़ मामले को लेकर हाईकोर्ट सख्त रवैया अपनाए हुए है। हाईकोर्ट में याचिका डालने वाले राकेश तोमर उत्तराखंडी के माध्यम से मांगी गई एक सूचना पर नजर डाली जाए तो उससे साफ है कि 2021 में विभाग ने मान लिया था कि भूमि पर साल के पेड़ों का कटान हो रहा है। 16 अगस्त 2021 तक 552 पेड़ काटे गए, जिसके आधार पर विभाग ने 11 मुकदमे दर्ज करके दो लाख 49 हजार रुपये प्रतिकर वसूला।
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इसके अलावा विभाग ने मौके से 360 बल्लीनुमा नग या 12़638 घनमीटर लकड़ी बरामद की। याचिकाकर्ता का आरोप है कि भूमि पर 2014 से लगातार कटान चल रहा था। कई हजार पेड़ काटकर भूमि का समतलीकरण कर दिया गया। कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े अधिकारी भी घेरे में आएंगे।
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छह रेंजर व पांच डीएफओ रहे तैनात
बाड़वाला का यह क्षेत्र कालसी वन प्रभाग की चौहड़पुर रेंज में आता है। 2014 में वन प्रभाग में रामगोपाल वर्मा डीएफओ रहे। इसके बाद से सुरेंद्र कुमार, श्रीप्रकाश शर्मा, बीबी मार्तोलिया, नितिशमणी त्रिपाठी डीएफओ रहे। इसी प्रकार से चौहड़पुर रेंज में 2014 में राजेंद्र सिंह रावत रेंजर रहे। उसके बाद से बीडी सकलानी, महावीर सिंह रावत, दिनेश लाल, कुलदीप सिंह पंवार, एडी सिद्दीकी रेंजर रहे।
अभी तक कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशन में चल रही कार्रवाई में अभी तक वन विभाग ने एक रेंजर एडी सिद्दीका, दो वन दरोगा रीता रमोला, महावीर सिंह चौहान, नायब तहसीलदार जयसिंह सैनी को निलंबित किया गया है। इसके अलावा वन दरोगा संजीव दूबे का ट्रांसफर किया जा चुका है।