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Dehradun News: घर गिरने के डर से रात-रात भर जाग रहे लोग
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एक दशक से अधिक समय से अमलावा नदी का दंश झेलते आ रहे साहिया के निवासी
तेज बहाव के पानी से किनारों पर बसी बस्तियों में रहने वाले 40 परिवार खतरे की जद में
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, राजकीय इंटर काॅलेज के भवनों को भी खतरा
2013-14, 2017 और 2022 में हुआ था व्यापक नुकसान
सरकार और प्रशासन के पास देने के लिए सिर्फ आश्वासन
अमलावा नदी के किनारे बसा साहिया बाजार और साहिया छानी का इलाका पिछले 11 साल से लगातार नदी के प्रकोप से जूझता चला आ रहा है। नदी के रौद्र रूप का खामियाजा अभी तक 30 से ज्यादा परिवार बेघर होकर और 200 से अधिक परिवार अपने मकानों में होने वाले नुकसान के रूप में भुगत चुके हैं। उधर सरकार और प्रशासन के पास क्षेत्रवासियों को हर साल नए-नए आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं है।
साहिया बाजार और छानी का क्षेत्र अमलावा नदी के दोनों किनारों पर बसा हुआ है। लगभग 300 मीटर साहिया छानी व लगभग 800 मीटर साहिया बाजार का क्षेत्र नदी के किनारों पर स्थित है। 19 जुलाई को अमलावा नदी में आए तेज बहाव के पानी से किनारों पर बसी बस्तियों में रहने वाले 40 परिवार खतरे की जद में हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, राजकीय इंटर काॅलेज के भवनों के गिरने का खतरा बना हुआ है।
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स्थिति यह है कि क्षेत्र से पांच परिवार गांव के लिए पलायन कर गए हैं। जो परिवार यहां अभी मौजूद हैं, वह घरों के गिर जाने के डर से रात-रात भर जाग रहे हैं। नदी के बहाव से किनारों की मिट्टी के कटाव की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर नदी के बहाव को दूसरी दिशा में मोड़ने का काम किया जा रहा है। साहिया की प्रधान नीलम सवई, पूर्व प्रधान मोहन लाल शर्मा, व्यापार मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार भसीन का कहना है कि हर साल आपदा के बाद अमलावा नदी से सुरक्षा को लेकर दावे तो किए जाते हैं लेकिन दूसरी बरसात में फिर से वही स्थिति क्षेत्रवासियों को झेलनी पड़ती है। संवाद
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11 साल से लोग झेल रहे नुकसान
2013-14 में साहिया के निवासियों को कई दशकों की राहत के बाद आपदा का सबसे बड़ा झटका लगा था। इस दौरान अमलावा नदी में आई बाढ़ से 17 परिवार बेघर हुए और 50 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचा था। वर्ष 2017 में अमलावा ने खतरनाक रुख इख्तियार किया जिससे 6 परिवार बेघर हुए और 21 मकानों को भारी नुकसान हुआ। 2019 में भी अमलावा नदी में बाढ़ आने से 6 परिवार बेघर हुए और 13 मकान व छानियों को नुकसान पंहुचा। वर्ष 2022 में एक बार फिर से 6 परिवार बेघर हुए और 12 मकानों और छानियों को नुकसान पहुंचा।
आपदा के बाद प्रशासन और सरकार की कार्रवाई
2013-14 में अमलावा नदी के कारण क्षेत्र में आई भारी आपदा के बाद प्रभावितों से मिलने आए क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह ने 20 लाख रुपये अपनी विधायक निधि से देने के साथ ही शासन से 6 करोड़ रुपये बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए स्वीकृत कराए। इसके पश्चात 2022 में आपदा से हुए नुकसान को लेकर क्षेत्रवासियों के हंगामा करने के बाद शासन से साढ़े चार करोड़ का बजट बाढ़ सुरक्षा के लिए स्वीकृत हुआ, जिसमें से सवा 3 करोड़ के बजट के एस्टीमेट की फाइलें अभी तक सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट रही हैं।
बयान...
आपदा के पहले ही सुरक्षा के सभी इंतजाम किए जाने चाहिए। कांग्रेस सरकार के दौरान छह करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था लेकिन सरकार बदलने के कारण निर्माण कार्य प्रारंभ करने में दो साल का समय लग गया। इसके बाद हर साल नुकसान होने के बावजूद अमलावा नदी में सुरक्षा के इंतजाम कराने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। - प्रीतम सिंह, विधायक, चकराता
अमलावा नदी में कराए जाने वाले बाढ़ सुरक्षा के कार्यों से संबंधित लगभग तीन करोड़ के प्रस्तावों पर अंतिम चरण की प्रक्रिया गतिमान है। उम्मीद है कि जल्दी ही बजट उपलब्ध हो जाएगा और नदी से हर साल होने वाले नुकसान की रोकथाम को ठोस कार्य कराए जाएंगे। - पीएन राय, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग