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Uttarakhand: रिटायर हो रहे अग्निवीरों के लिए बनेगी स्पेशल सेल; सेना और सरकार के अधिकारी होंगे शामिल

Sun, 19 Jul 2026 01:24 AM IST
देहरादून ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 19 Jul 2026 01:24 AM IST
सार

अग्निवीर सैनिकों की योग्यता एक सैनिक के रूप में काम करने की होती है, जबकि समाज या शासन-प्रशासन में काम करने के लिए अलग प्रकार की दक्षता की आवश्यकता होती है।

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Uttarakhand Special cell to be set up for retiring Agniveer; Army and government officials to be included
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी - फोटो : ANI

विस्तार

पुष्कर सिंह धामी सरकार ने चार साल की सेवा के बाद रिटायर हो रहे अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए विशेष सेल के गठन की घोषणा की है। इस सेल में सेना और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे जो अग्निवीरों के समायोजन का रोडमैप तैयार करेंगे। दिसंबर-जनवरी में उत्तराखंड के 1200 अग्निवीर अपनी सेवा पूर्ण कर घर लौटेंगे।

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अग्निवीर सैनिकों की योग्यता एक सैनिक के रूप में काम करने की होती है, जबकि समाज या शासन-प्रशासन में काम करने के लिए अलग प्रकार की दक्षता की आवश्यकता होती है। इसे ध्यान में रखते हुए अग्निवीर सेल ऐसे कोर्स डिजाइन करेगी जिसका प्रशिक्षण देकर अग्निवीरों को किसी सेवा में भेजा जाएगा।
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अग्निवीर सैनिकों के रिटायर होने पर सेना की ओर से उन्हें 17 विशेष श्रेणी (जैसे शेफ, ड्राइविंग, क्राफ्टमैनशिप इत्यादि) के प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इन्हें दिखाकर अग्निवीर युवा निजी या सरकारी सेवा के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से ही अग्निवीरों के भविष्य को लेकर तमाम संदेह व्यक्त किए जा रहे थे, लेकिन धामी सरकार की अग्निवीर सेल की स्थापना ने इन संदेह के बादलों को छांटने का काम किया है। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि रिटायर होने के बाद भी अग्निवीर बेरोजगार नहीं रहेंगे। उन्हें सरकारी नौकरी, स्वरोजगार या निजी क्षेत्र में नौकरी करने के लिए व्यापक अवसर प्रदान किए जाएंगे।

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युवाओं में दिखा उत्साह
यूथ फाउंडेशन के जरिये हजारों युवाओं को सैन्य भर्ती के लिए प्रशिक्षण दे चुके पूर्व कर्नल अजय कोठियाल ने अमर उजाला से कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्निवीर सेल की स्थापना कर सभी आशंकाओं को समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि युवा पहले ही भारी संख्या में सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने के लिए तैयार थे, लेकिन इस घोषणा ने अग्निवीर के रूप में सेना में जाने के लिए उन्हें और अधिक आश्वस्त कर दिया है। इस घोषणा का सकारात्मक असर युवाओं के बीच दिखाई दे रहा है।

सेना में बदलते रहे हैं नियम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अग्निवीरों के भविष्य को लेकर संदेह अवश्य व्यक्त किए गए, लेकिन सच्चाई यह है कि अपनी कुशलता बढ़ाने के लिए सेना समय-समय पर नियमों में बदलाव करती रहती है। 1970 के दशक में सात साल के कार्यकाल के बाद जो जवान सेवा से बाहर हो जाते थे, उन्हें पेंशन नहीं दी जाती थी। अभी भी सैन्यकर्मियों का एक हिस्सा 15 साल की सेवा से पूर्व रिटायर होने पर पेंशन सुविधा का लाभ नहीं पाता। इसी प्रकार अधिकारी वर्ग के सैन्यकर्मी यदि 20 साल की सेवा से पूर्व रिटायरमेंट ले लेते हैं तो उन्हें पेंशन सुविधा का लाभ नहीं मिलता। इस तरह अग्निवीरों के लिए पेंशन न होना कोई नया नियम नहीं है।

शादी करने पर प्रतिबंध नहीं
सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों के विवाह करने पर प्रतिबंध केवल उनके लिए नहीं है। असलियत यह है कि सेना की किसी भी श्रेणी में भर्ती हुए जवान के 25 वर्ष के पूर्व विवाह करने पर उन्हें परिवार के साथ रहने के लिए आवास अलॉट नहीं किया जाता। ऐसे में सभी जवान 25 वर्ष के बाद विवाह करने को प्राथमिकता देते हैं।

नए तरह का समाज बनाने में होंगे सहायक
सभी अग्निवीर चार साल सेना के कड़े अनुशासन में रहने के बाद समाज में जाएंगे। इसके बाद वे जिस भी क्षेत्र या सेवा में जाएंगे, अपने साथ काम करने की एक नई संस्कृति लेकर जाएंगे। इससे समाज के अलग-अलग वर्गों में अनुशासन, पेशेवर सोच और व्यवहारगत बेहतरी आने की संभावना है।

आपातकाल में तैयार मिलेंगे सैनिक
आपातकालीन परिस्थिति में यही रिटायर्ड अग्निवीर सैनिक सरकार के लिए एक पूल की तरह काम करेंगे। आवश्यकता के अनुसार इन्हें मुख्य सेना के बैकहैंड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सैनिक सेवा वाले देशों में सैनिकों के पूल बैंक का अनुभव बहुत अच्छा रहा है। अग्निवीर सैनिकों के रूप में अब भारत के पास भी ऐसा पूल हमेशा तैयार होगा।

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