आतंकी छोड़ साथी पर ही तान दी बंदूक!
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यात्रियों से भरी एक बस पर कुछ आतंकियों ने कब्जा कर लिया। देहरादून की सड़कों पर दौड़ती इस बस को रोकने के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते की टीम पहुंची। बस को रोककर चारों ओर से घेर लिया गया।
जवानों ने मोर्चा तो लिया, लेकिन इस तरह कि उनकी बंदूकों की नलियां आतंकियों के बजाय एक-दूसरे की ओर हो गईं। बुधवार को आतंकवाद निरोधक दस्ते (गुलदार) की टीम ने पुलिस लाइन में पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू के सामने कुछ इसी तरह अपने प्रशिक्षण का प्रदर्शन किया।
शुरुआत तो ठीक रही, लेकिन आखिरी चरण में जैसे ही जवानों ने बस को घेरने का तरीका दिखाया, महानिदेशक भड़क गए। प्रशिक्षण पर कड़ी नाराजगी के साथ उन्होंने यह संतोष जताया कि यह सिर्फ प्रदर्शन भर था। कहा, अगर असली आतंकी वारदात होती तो जवान एक-दूसरे को ही गोलियों से छलनी कर डालते।
गिनाई ये खामियां
- आतंकियों, अपराधियों को चारों ओर से घेरने के दौरान भी बंदूकों की नलियां अपने साथियों की ओर नहीं होनी चाहिए।
- फायरिंग हुई तो अपनी ही गोलियों से मारे जाएंगे जवान।
- गुलदार दस्ते के जवानों का घुड़सवारी प्रदर्शन असंतोषजनक।
15 दिन बाद फिर करेंगे निरीक्षण
पुलिस महानिदेशक ने दस्ते के प्रभारी और पुलिस महानिरीक्षक (अभिसूचना) जीएन गोस्वामी को तलब कर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह 15 दिन बाद दोबारा दस्ते का निरीक्षण करेंगे। इस बीच सभी खामियां दूर करने का निर्देश दिया।
यह है दस्ता
वर्ष 2010 में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में गुलदार दस्ते का गठन किया गया था। इस दस्ते में तीन पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर), सात उपनिरीक्षक (एसआई), 13 मुख्य जवान (हेड कांस्टेबल), 95 जवान शामिल हैं।