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देहरादून में गुलदार का आतंक, लगा 'कर्फ्यू'

Mon, 19 Jan 2015 04:42 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 19 Jan 2015 04:42 PM IST
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terror of man eater leopard.

चार साल की रोशनी उस कृष्णा की बहन है, जिसे गुलदार उठा ले गया। दो दिन से यह मासूम मां-पापा को रोते हुए देख रही है। जिस झोपड़ी में वह भाई, मां-पापा संग रहती थी, रविवार को वह उजड़ गई। उसे नहीं पता, भाई कहां गया है।

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वो मां से पूछना चाहती है, भाई कब आएगा? लेकिन उसके पूछने से पहले ही मां की आंखें बरसने लगती हैं तो वह अपनी हैरानी छोड़ मां को संभालने में जुट जाती है। मां की गोद में बैठ रोशनी के नन्हे हाथ उसकी आंखों से झरते आंसुओं को पोंछने लगते हैं।
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मां चुप नहीं होती तो वह बार-बार कहती है, ‘मत रो मां, भाई खेलने गया है, थोड़ी देर में आ जाएगा।’ मां सच जानती है, लेकिन क्या कहे? मासूम दिलासा के बाद वो भी बच्ची को सीने से लगा भीतर उमड़ते दर्द को समेटने की कोशिश में जुट जाती है।
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पापा नहीं बता रहे सच
मासूम रोशनी बार-बार पिता कर्ण सिंह से भाई के बारे में पूछती है। लेकिन पापा बच्ची के मन पर बुरे असर की आशंका से डरकर यही जवाब हर बार देते हैं, भाई खेलने गया है।

मां की आंखों में वो खौफनाक पल
मां गीता बार-बार बेसुध हो रही है। उसकी आंखों में शुक्रवार देर शाम का वह पल उभर रहा है, जब उसके सामने ही गुलदार उसकी आंखों के चिराग को उठा ले गया।

गीता बार-बार उस झाड़ी की ओर देखती है, जहां गुलदार घात लगाए बैठा था। गीता को कुछ हलचल महसूस हुई भी थी, लेकिन उसे लगा कोई कुत्ता है। हालांकि, वह कृष्णा के साथ ही खड़ी थी।

लेकिन सिर्फ एक पल के लिए नजर हटी तो झाड़ियों से छलांग लगाकर गुलदार ने कृष्णा को दबोच लिया। चिल्लाते हुए गीता अपने लाल को बचाने दौड़ी भी थी, लेकिन...। अब गीता उस पल को कोस रही है, जब वह बेटे को हाथ धुलाने झोपड़ी से बाहर लेकर आई थी।

हर कदम पर ‘खौफ’ का पहरा

terror of man eater leopard.

मुख्य सड़क से करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर, घने जंगल के बीच गुजरता कच्चे, ऊबड-खाबड़ वाला रास्ता बाजावाला तक पहुंचाता है। ‘सड़क’ के दोनों ओर उगी हैं आदमकद झाड़ियां और इनके पीछे मीलों तक घना जंगल।

रात के वक्त को इस रास्ते पर निकलना खतरनाक माना जाता है, लेकिन गुलदार के हमले के बाद खतरे का खौफ सुबह भी तारी हो गया है। आलम यह है कि इस रास्ते पर सन्नाटा पसरा है। दोपहर में भी लोग समूह में ही इस रास्ते से निकल रहे हैं। जरूरी काम न हो तो बाहर निकलना टाल दिया जा रहा है।

रविवार को अमर उजाला टीम ने बाजावाला क्षेत्र का जायजा लिया। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की गेट संख्या नौ से बाजावाला का सफर शुरू होता है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबा रास्ता था, लेकिन करीब दो सौ मीटर आगे बढ़ते ही दोनों ओर घनी झाड़ियां और चारों ओर जंगल नजर आने लगा। सड़क खस्ताहाल।

कोई आता-जाता नहीं दिखा तो लगा कहीं रास्ता न भटक जाएं। करीब एक किलोमीटर आगे एक जीप दिखी। उसमें बैठे दो लोगों से पूछा तो मालूम चला कि बाजावाला का रास्ता यही है। कुछ आगे पुल पार कर बाजावाला पहुंचे।

गांव में घुसते ही महिलाएं रास्तों पर दिखीं, जबकि पुरुष झाड़ियों के इर्द-गिर्द जुटे थे। सबकी निगाहें उस जंगल की ओर थीं, जहां शुक्रवार रात गुलदार बच्चे को उठा ले गया था। अमर उजाला टीम को देखते ही ग्रामीण पास आ गए। बातचीत शुरू हुई तो पता चला कि मौके पर न तो शिकारी हैं, न ही वन विभाग का कोई कर्मचारी।

ग्रामीणों का कहना था कि हलचल के दौरान गुलदार बाहर नहीं आता। बाबूराम यादव ने बताया कि गांव से शहर तक का सफर डरावना हो गया है। दोपहर में भी बच्चों को अकेले नहीं निकले दिया जा रहा है। धीरज सिंह बिष्ट कहते हैं कि कई माह से गुलदार का जोड़ा नजर आ रहा था। शिकायतें कीं, लेकिन वन विभाग लापरवाह बना रहा।

खत्म नहीं हो रही गुलदार की दहशत

terror of man eater leopard.

सावधान रहना जरूरी है क्योंकि आपके देहरादून में आदमखोर गुलदार घूम रहा है। बाजावाला और फूलसैंणी में दहशत का सबब बना गुलदार वन विभाग और शिकारियों को चकमा दे रहा है।

ग्रामीणों के विरोध के बाद हरकत में आए विभाग को पहले ही दिन मुंह की खानी पड़ी। जंगल में लगाए मचान के नीचे बंधी बकरी को आदमखोर गुलदार उठा ले गया, जबकि ऊपर बैठे शिकारी गोली तक नहीं चला सके।

बाजावाला में दो दिन पहले झुग्गी में रहने वाली गीता के दस वर्षीय बेटे कृष्ण को गुलदार ने शिकार बनाया था। शनिवार को दिन में गुलदार नजर तो आया, लेकिन वन विभाग पकड़ नहीं सका। इसके बाद विभाग ने दो शिकारियों को जंगल में मचान पर बैठाकर नीचे बकरी बांध दी।

रात करीब 12 बजे अचानक गुलदार आया और बकरी को उठा ले गया। लेकिन मचान पर बैठे शिकारी देखते रह गए। इसके बाद एक बार फिर बाजावाला और फूलसैंणी गांवों के लोगों में दहशत फैल गई है। स्कूली बच्चों को अभिभावक एक साथ छोड़ने-लेने जा रहे हैं।

पिंजरे में नहीं थी बकरी
वन विभाग की एक लापरवाही यह रही कि जंगल में बकरी को पिंजरे में नहीं रखा गया। बकरी को टेलीफोन के पतले तार से खुले में बांधा गया था। ऐसे में बकरी गुलदार का आसान शिकार बन गई। बकरी पर झपट्टा मारकर वह जंगल में भाग गया।

खाने के लिए भटके शिकारी

वन विभाग द्वारा बुलाए गए शिकारियों को खाना नहीं मिल पा रहा है। दोनों शिकारी रात दस बजे तक ठेलियों पर खाना खाने के लिए भटकते रहे। किसी तरह खाना मिलने के बाद वे मचान पर बैठे। इसके बाद सुबह दोनों निकल गए, लेकिन कई जगह भटकने के बावजूद दोपहर तीन बजे तक उन्हें खाना नहीं मिला था। दोनों शाम पांच बजे के बाद लौटे।

गुलदार मारो, नहीं तो चक्काजाम

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आदमखोर गुलदार को काबू करने में नाकाम वन विभाग के खिलाफ बाजावाला और फूलसैंणी गांव के लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। रविवार को दिनभर विभाग के आला अधिकारियों का इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि रात तक गुलदार पकड़ा या मारा न गया तो कौलागढ़ रोड पर चक्काजाम और डीएफओ कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा।

प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) सुशांत पटनायक ने ग्रामीणों से एक दिन का वक्त मांगा है। क्षेत्र में दो दिन पहले दस वर्षीय बच्चे को मारने और शनिवार रात बकरी को निवाला बनाने वाले गुलदार की दहशत पसरी है। रविवार को दिनभर कोई वन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

कुछ वन कर्मचारी मौजूद रहे, लेकिन वे भी खाली हाथ रहे। ग्रामीण निरंजन सिंह का कहना है कि उन्हें विभाग से कोई राहत नहीं मिल रही है। डीएफओ सुशांत पटनायक ने ग्रामीणों से एक दिन का वक्त मांगा है।

लंबे समय से विभाग लापरवाह बना है। कई शिकायतों के बावजूद अधिकारी सुध नहीं ले रहे। इतनी बड़ी घटना के बावजूद विभाग मौन है।
- बाबूराम यादव, ग्रामीण

अगर एक दिन में गुलदार को नहीं मारा गया तो मंगलवार को ग्रामीण कौलागढ़ रोड के मुख्य गेट पर जाम लगाएंगे। साथ ही डीएफओ कार्यालय पर प्रदर्शन होगा।
- मनोज यादव, ग्रामीण

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