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दून शहर पर 50 हजार कुत्तों का 'कब्जा', पढ़ लीजिए

Sun, 30 Aug 2015 03:40 PM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 30 Aug 2015 03:40 PM IST
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terror of dog in dehradun.

शहर में कुत्तों का आतंक कितना बढ़ गया है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम में सचिव (ऊर्जा) उमाकांत पंवार ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से कहा था कि साहब! हम शहर में कुत्तों से परेशान हैं। इनकी वजह से सुबह-शाम टहलना मुश्किल हो गया है।

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स्थिति कितनी भयावह है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुत्तों के काटने से घायल लोगों की संख्या दून अस्पताल में एक हफ्ते में 120 से 150 हो जाती है। वहीं, नगर निगम में 15-20 शिकायतें हर रोज दर्ज की जाती हैं।
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शहर में हैं 50 हजार कुत्ते
पिछले कई सालों से कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। इस वजह से कुत्तों की संख्या हर साल हजारों में बढ़ रही है। इस समय शहर में कुत्तों की संख्या 50 हजार से अधिक है।
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कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने का जिम्मा नगर निगम के पास है, लेकिन निगम इस मामले में कुछ भी नहीं कर पा रहा है। जानकार बताते हैं कि यदि कुत्तों की नसबंदी कर दी जाए तो इनकी संख्या में नियंत्रण पाया जा सकता है। नगर निगम यह भी नहीं कर पा रहा है।

बनी थी कुत्तों की नसबंदी की योजना

terror of dog in dehradun.

कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर निगम ने पीएफए (पीपुल्स फॉर एनिमल) से करार करने की कोशिश की थी लेकिन संस्था ने प्रत्येक कुत्ते के हिसाब से भुगतान की मांग कर दी तो निगम पीछे हट गया। इसके बाद निगम किसी अन्य संगठन या संस्था से करार नहीं कर पाया।

वहीं नगर निगम के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने का कारगर उपाय कर पाता। नगर निगम का कहना है कि चूंकि वह किसी संस्था का वित्तीय भार नहीं उठा सकता, इसलिए निगम के चिकित्सक ही ऑपरेशन का काम करेंगे, लेकिन फिलहाल नगर निगम के पास केवल एक चिकित्सक है।

मेयर का है कहना
कुत्तों की समस्या के लिए अस्पताल बनाया जा रहा है। जब तक यह बन नहीं जाता तब तक इस समस्या का कोई हल नहीं है।
-विनोद चमोली, मेयर

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