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आपदा ने उजाड़ दिए उर्गम घाटी के मठ-मंदिर
अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Fri, 27 Sep 2013 05:55 PM IST
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चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित प्राचीन मंदिर भी आपदा से तहस-नहस हो गए हैं। यहां पंच केदारों में से एक कल्पेश्वर महादेव मंदिर भी भूस्खलन की जद में आ गया है। मंदिर के परिसर से भूस्खलन हो रहा है।
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चमोली जिले में उर्गम घाटी को ऋषि मुनियों की तपस्थली के रूप में जाना जाता है। आदिकाल में उर्वा ऋषि ने इसी घाटी में तपस्या की थी।
देव प्रतिमा की अन्यत्र पूजा
जिनके नाम से घाटी का नाम उर्गम पड़ा। हाल की आपदा से उर्वा ऋषि मंदिर के गर्भगृह तक कल्पगंगा का मलबा भरा है। यहां भोलेनाथ की पूजा-अर्चना होती थी। अब ग्रामीण देव प्रतिमा की अन्यत्र पूजा कर रहे हैं।
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यहां स्थित मां चंडिका के मंदिर का नामोनिशान ही मिट गया है। मंदिर का अब यहां सिर्फ प्रवेश द्वार ही बचा है। स्थानीय ग्रामीण लक्ष्मण सिंह नेगी का कहना है कि उर्गम घाटी पूर्व से ही देव स्थली रही है।
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क्षेत्र में मंदिरों का जीर्णोद्धार
यहां साक्षात देवों के होने की अनुभूति होती है। आपदा से उर्गम और देवग्राम का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। इधर, जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा का कहना है कि क्षेत्र में मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। उर्गम घाटी में जगह-जगह सुरक्षा दीवार का निर्माण भी किया जाएगा।