इस वीआईपी सीट के फेर में उलझी है कांग्रेस
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पार्टी चाह रही है, टिहरी पर जो भी फैसला हो, उसमें विजय बहुगुणा की हां हो। ऐसे में बहुगुणा को ही फैसला लेना है कि बेटे साकेत बहुगुणा या फिर किसी और का चयन करें।
हालांकि, पेंच यह भी है कि साकेत के नाम पर पार्टी में एकराय नहीं बन रही है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड कांग्रेस के नए प्रभारी राजीव शुक्ला ने भी बहुगुणा परिवार से बात की है।
हरिद्वार सीट का फैसला रावत पर
हरिद्वार सीट का फैसला भी हरीश रावत पर छोड़ा गया है। यहां से लगभग तय है कि रावत की पत्नी रेणुका ही चुनाव लड़ेंगी।
दो महत्वपूर्ण सीटों पर अभी तक फैसला न होने को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अमर उजाला से कहा कि पांचों सीटों पर बस घोषणा शेष है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी सीटों पर एक साथ शनिवार को नामों की घोषणा हो जाएगी।
टिहरी से पहले बहुगुणा को लड़ाने पर अड़े हरीश रावत अब भी उन्हें छोड़ने के मूड में नहीं हैं। आलाकमान से उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यहां बहुगुणा से पूछकर ही फैसला लिया जाए। ऐसा करके हरीश रावत बहुगुणा को नाराज करने से भी बचेंगे और हार-जीत की जिम्मेदारी भी तय रहेगी।
बहुगुणा चाहते हैं बेटे के लिए टिकट
बताते हैं विजय बहुगुणा के इनकार के बाद हरीश रावत ने दिल्ली से ही फोन पर मंत्री प्रीतम सिंह, विधायक नवप्रभात और पूर्व विधायक किशोर उपाध्याय से टिहरी से चुनाव लड़ने पर रायशुमारी की।
तीनों ही नेताओं ने पहले तो चुनाव लड़ने से स्पष्ट इनकार कर दिया, फिर बहुगुणा की हां के बाद ही कोई फैसला लेने की बात कही।
दरअसल पिछले दिनों विजय बहुगुणा ने अपने समर्थक विधायकों की बैठक में खुद और बेटे पर रायशुमारी कराई थी। सभी ने विजय बहुगुणा से ही चुनाव लड़ने को कहा था।
साफ है तब बहुगुणा समर्थक भी साकेत को लेकर तैयार नहीं दिख रहे थे। बहुगुणा चाह रहे हैं कि उनके न लड़ने पर साकेत को टिकट मिल जाए।