फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   tehri dam migrated doesn't have right to choose pradhan.

गजब: यहां एमपी-एमएलए चुन सकते हैं, लेकिन प्रधान नहीं!

Wed, 17 Feb 2016 01:51 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 Feb 2016 01:51 AM IST
विज्ञापन
tehri dam migrated doesn't have right to choose pradhan.

टिहरी बांध निर्माण के चलते विस्थापित सैकड़ों परिवार भूमिधरी अधिकार से वंचित हैं। टिहरी झील में न केवल इनके बसे बसाये गांव डूबे, बल्कि अपनी पंचायत चुनने का अधिकार भी डूब गया। यह लोग सांसद और विधायक तो चुन सकते हैं, लेकिन अपना ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार इन्हें नहीं है।

विज्ञापन


करीब डेढ़ दशक से तकरीबन तीन हजार परिवार हक के लिए लड़ रहे हैं। अब मुख्य सचिव ने 23 फरवरी को तमाम पत्रावलियों सहित सचिव राजस्व के साथ हरिद्वार और देहरादून के जिलाधिकारियों की बैठक बुलाई है।
विज्ञापन


देश को रोशन करने की खातिर अपनी जड़ों से दूर हुए टिहरी बांध के विस्थापित खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। ऋषिकेश, पशुलोक और हरिद्वार के पथरी क्षेत्र के करीब पांच हजार से अधिक परिवारों को भूमिधरी अधिकार नहीं मिले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पथरी क्षेत्र के गांव तो राजस्व में आ गए, लेकिन, ऋषिकेश और पशुलोक क्षेत्र के दर्जनों गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया है। इसमें मालीदेवल, गोदी सिराई, बिरानी गांव, उप्पु, डोगरा, असीना, लम्पुगड़ी आदि गांव शामिल हैं। इन गांवों में करीब 20 हजार से अधिक की आबादी रहती है।

दूसरी ग्रामसभाओं के सहारे कर रहे काम

tehri dam migrated doesn't have right to choose pradhan.

राजस्व ग्राम न होने से विस्थापित लोग ग्राम प्रधान या दूसरे पंचायत प्रतिनिधि नहीं चुन सकते। विकास कार्यों के लिए दूसरी ग्राम सभाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। प्रभावितों का कहना है कि बजट के संबंध में दूसरी ग्राम सभाओं की भी समस्याएं होती हैं। जिस पर इन ग्राम सभाओं से विस्थापित क्षेत्र के विकास कार्य संभव नहीं होते। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उन्हें फायदा नहीं मिल पाता। भूमिधरी अधिकार न होने की वजह से जमीन पर बैंक से लोन नहीं मिलता है।

करीब 15 साल पूर्व हमें पशुलोक, श्यामपुर आदि स्थानों पर विस्थापित किया गया। राजस्व ग्राम और भूमिधरी अधिकार के लिए सरकारों से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। इससे सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
-हरी सिंह भंडारी, अध्यक्ष विस्थापित समन्वय विकास समिति पशुलोक

टिहरी बांध विस्थापितों और प्रभावितों के हितों की घोर अनदेखी हो रही है। राजनेता और अफसर सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। इस संबंध में राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी शिकायत पर संज्ञान लिया है।
-दिनेश डोभाल, अध्यक्ष टिहरी बांध प्रभावित पुनर्वासित जन संयुक्त समिति

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed