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अब खाद्य सुरक्षा योजना गुरुजी के 'हाथ'
अमर उजाला, बिशन सिंह बोरा, देहरादून
Updated Mon, 16 Sep 2013 10:34 AM IST
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अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी छोड़ राजधानी में सोमवार से प्राथमिक विद्यालयों के गुरुजी घर-घर दरवाजे खटखटाते नजर आएंगे।
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दरअसल, खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों के सर्वे में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। खास बात यह है कि अध्यापन छोड़ सभी सरकारी योजनाओं के सर्वे का जिम्मा हर बार शिक्षकों पर ही डाल दिया जाता है। इसका असर सरकारी स्कूलों के नौनिहालों पर नजर आएगा।
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यह हाल तब है, जबकि सालभर में 225 शैक्षणिक दिवस भी विभिन्न वजहों से पूरे नहीं हो पाते। हैरत यह कि शिक्षकों के विरोध के बावजूद न तो शिक्षा मंत्री और न विभागीय अधिकारी इस ओर सुध ले रहे हैं।
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जिला प्रशासन ने दिया है आदेश
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) हरक सिंह रावत की ओर से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और नगर शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में आदेश दिया गया है। इसके बाद ड्यूटी पर लगाए जाने वाले शिक्षकों को संबंधित अधिकारियों ने मौखिक तौर पर सोमवार (आज) सुबह 11 बजे नगर निगम में प्रशिक्षण के लिए जाने को कहा है। यहां से शिक्षक सीधे सर्वे पर निकलेंगे।
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जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा योजना के लिए सर्वे का काम पूरे प्रदेश में किया जाना है। इसकी शुरुआत सोमवार से देहरादून से हो रही है। इसके बाद एक-एक कर सभी जिलों में सर्वे किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सभी जगह प्रशासन शिक्षकों पर ही यह जिम्मा डालने वाला है।
कब कहां लगी ड्यूटी
-अगस्त में सहकारी समिति के चुनाव में ड्यूटी
-अगस्त में आधार कार्ड बनाने में ड्यूटी
-15 जुलाई से 15 अगस्त तक बीएलओ ड्यूटी
-जुलाई में बालगणना
-नगर निगम चुनाव एवं उप चुनावों में ड्यूटी
शिक्षकों के अवकाश और प्रशिक्षण
वर्ष में 35 विभागीय अवकाश, 14 सीएल, 52 रविवार, वर्षभर समय-समय पर विभागीय प्रशिक्षण और सरकारी सर्वे की जिम्मेदारी
एकल शिक्षकों के भरोसे
विभागीय सूत्र बताते हैं कि शिक्षकों की सर्वे में ड्यूटी लगाने के दौरान स्कूल बंद नहीं होंगे। इस तरह की व्यवस्था की जा रही है कि हर स्कूल में एक शिक्षक बचा रहे। इसके बाद सर्वे पूरा होने तक एक ही शिक्षक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को संभालने, पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी निभाएगा।
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सरकार तो लापरवाह है ही, तबादलों के विरोध, स्कूलों को पीपीपी मोड पर दिए जाने के विरोध और विभिन्न लंबित मांगों के लिए समय-समय पर शिक्षक संघों के आंदोलनों ने भी अध्यापन कार्य को खासा नुकसान पहुंचाया है।
मुझे पता चला है कि शिक्षकों की ड्यूटी खाद्य सुरक्षा योजना में लगाई जा रही है। आरटीई में प्रावधान है कि चुनाव एवं जनगणना के अलावा शिक्षकों की अन्य गैर शैक्षणिक कार्य में ड्यूटी न लगाई जाए। मैं आज खाद्य विभाग से जानकारी लेकर कार्रवाई करूंगी।
- मनीषा पंवार, शिक्षा सचिव
दून में प्राथमिक के 70 फीसदी शिक्षकों को सर्वे में लगाया है, चमोली में सीआरसी की ड्यूटी लगी है। दून से इसकी शुरुआत होनी है, लेकिन इसका विरोध किया जाएगा। हालत यह है कि कुछ स्कूलों में 50 फीसदी से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है।
- प्रेम सिंह गुसाईं, प्रदेश अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
सरकार ने हमें शिक्षक नहीं बल्कि बहुउद्देशीय कर्मी बना दिया है। डीईओ, सीईओ से लेकर मंत्री तक को स्थिति से अवगत करा चुके हैं, लेकिन बच्चों की किसी को परवाह नहीं है।
- वीरेंद्र सिंह कृषाली, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
शिक्षकों को स्कूलों से दूर रखकर यहां पढ़ने वाले बच्चों का अहित किया जा रहा है। सरकार के ऐसे निर्णयों के इसके खिलाफ हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
- चंद्रप्रकाश पाल, ब्लॉक उपाध्यक्ष, रायपुर
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