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सुगम में डटे शिक्षकों को जाना ही पड़ा दुर्गम
अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Sun, 29 Sep 2013 03:40 PM IST
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उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में डेढ़ से दो दशक पूर्व से सुगम स्थानों पर ही नौकरी कर रहे शिक्षकों को अब अनिवार्य स्थानांतरण के बाद दुर्गम क्षेत्रों की मीलों दूरी मापनी पड़ेगी।
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खिर्सू ब्लॉक के सबसे सुगम विद्यालयों में जीआईसी और जीजीआईसी श्रीनगर शामिल हैं। यहां से भी चार शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ है।
22 साल से सुगम में डाले बैठे थे डेरा
जीआईसी में 22 साल से कार्यरत व्यायाम शिक्षिका कमली बिष्ट का स्थानांतरण कोट ब्लॉक के हाईस्कूल कोटसाड़ा में हुआ है। हिंदी प्रवक्ता उषा बहुगुणा को वर्ष 1985 में जीजीआईसी श्रीनगर में नियुक्ति मिली।
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कॉलेज में आठ साल सेवाएं देने के बाद इन्होंने देवप्रयाग में चार साल और किलकिलेश्वर में तीन साल कार्य किया और फिर प्रमोशन के साथ तीन साल पूर्व जीजीआईसी श्रीनगर लौट आई। लेकिन अब अनिवार्य स्थानांतरण के तहत उन्हें जीजीआईसी नारायणबगड़ की दूरी नापनी पड़ी है।
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दुर्गम क्षेत्र में स्थानांतरण
इसी तरह जीआईसी श्रीनगर में डेढ़ दशक से नियुक्त एलटी शिक्षक मनोज कुमार बहुगुणा का भी दुर्गम क्षेत्र में स्थानांतरण हुआ है। इसके अतिरिक्त भौतिक विज्ञान प्रवक्ता वाईएस बर्त्वाल का धारी ढुंडसिर स्थानांतरण हुआ। हालांकि शिक्षक बर्त्वाल वर्तमान में अस्वस्थ होने के कारण मेडिकल पर हैं।